उत्तराखंड

लोकसभा चुनाव:तो चुनाव से पहले ही कांग्रेस नेताओं ने मान ली है हार! 2024 में कैसे रोकेंगे भाजपा का विजय रथ।कभी टिकट के लिए होती थी मारामारी। अब बड़े नेता चुनाव लडने से काट रहे कन्नी।

नरेन्द्र राठौर

रुद्रपुर(खबर धमाका)। देश में 70 वर्ष तक सत्ता का सुख भोगनी वाली कांग्रेस में अब वो उत्साह,जोश और जूनून नहीं बचा है,हालत यह कि जिस कांग्रेस में टिकट पाने के लिए मारामारी होती थी,आज उसी कांग्रेस के टिकट से पार्टी के बड़े नेता छुटकारा पाने की कोशिश कर रहे हैं। उत्तराखंड ही देश में कांग्रेस का यही हाल, इसीलिए कांग्रेस हाईकमान को बड़े नेताओं से टिकट लेने आहवान करना पड़ रहा है।

यूं तो कांग्रेस नेता राहुल, सोनिया और राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिकार्जुन खड़गे पिछले काफी समय से 2024 में भाजपा का विजय रथ रोकेंगे का दावा करते नजर आ रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके पूरी तरह उलट है,यह बात कोई समझे या न समझे लेकिन कांग्रेस के नेता जरुर समझ रहे हैं। उन्हें पता कि चुनावी समर में कूदने का मतलब है,कि अपने दामन में एक हार का दाग लगाना।

यही बजह है कि कांग्रेस के लगभग सभी बड़े नेता इस बार टिकट लेने से इंकार करते नजर आ रहा है।

उत्तराखंड की बात करें तो राज्य में यशपाल आर्य,करने मेहरा, हरीश रावत,भुवन कापड़ी, प्रीतमसिंह जैसे बड़े नेता मौजूद हैं। नैनीताल ऊधमसिंहनगर सीट की बात करें तो नेता प्रतिपक्ष यशपाल यही से लंबे समय से विधायक हैं,इस सीट पर चुनावी गणित ऐसा है,जो पूरी तरह उनके पक्ष में है, लेकिन यशपाल आर्य ने टिकट उनके नाम होता, इससे पहले ही इंकार कर सबको चौका चुके हैं। यही हाल हरिद्वार सीट का भी है, पूर्व मुख्यमंत्री ने इस सीट पर खुद श लडकर अपने बेटे के लिए टिकट मांग है, हालांकि इस सीट के लिए कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष करन मेहरा ने भी दावेदारी की है, लेकिन बताया जा रहा कि अब वह पीछे हट गए, क्योंकि उन्हें पता कि चुनाव लडने का मतलब है,कि प्रदेशाध्यक्ष की कमान उनसे छीन ली जायेगी। यही हाल उत्तराखंड में नहीं,पूरे देश में है। यही बजह है कि कांग्रेस हाईकमान अभी तक सिर्फ 39 प्रत्याशियों की पहली लिस्ट की ही घोषणा कर सका है।

जो कहीं न कहीं इशारा कर रहा कि कांग्रेसी नेताओं ने चुनाव से पहले ही मान ली है।

कांग्रेस से नेताओं की मानें तो टिकट वितरण में हो रही देरी पार्टी के लिए बड़ा नुक्सान दायक साबित होगी।

नैनीताल ऊधमसिंहनगर लोकसभा सीट से दावेदारी करने वाले पूर्व दर्जा राज्यमंत्री गणेश उपाध्याय की मानें तो पार्टी को भाजपा से पहले अपने उम्मीदवारों की घोषणा करनी चाहिए थी,जिसका फायदा पार्टी प्रत्याशी को जरुर मिलता।