एन.एस.एस.:सेवा और विकास की राह।डॉ. सत्यमित्र, रानीखेत
“सेवा का दीप जलाना है,
समाज को आगे बढ़ाना है।
मिलकर कदम बढ़ाएँ हम,
नई रोशनी फैलाना है।”
राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आंदोलन है, जो युवाओं को समाज की सच्चाइयों से जोड़ता है। यह हमें अनुशासन, टीम वर्क, नेतृत्व और सबसे महत्वपूर्ण—निःस्वार्थ सेवा की भावना सिखाता है। आज के समय में, जहाँ व्यक्तिगत सफलता को अधिक महत्व दिया जाता है, वहाँ एन.एस.एस. हमें यह याद दिलाता है कि असली संतुष्टि तब मिलती है जब हम दूसरों के जीवन में बदलाव लाते हैं।
लेकिन केवल नियमित गतिविधियाँ पर्याप्त नहीं होतीं। एन.एस.एस. शिविरों का आयोजन जरूरी है, ताकि हम समाज की वास्तविक समस्याओं को करीब से देख सकें और उनके समाधान के लिए कार्य कर सकें। ये शिविर हमें धैर्य, संवेदनशीलता और आत्मनिर्भरता सिखाते हैं—जो एक सशक्त और जिम्मेदार नागरिक की पहचान है।
एन.एस.एस. क्यों आवश्यक है?
• सेवा भावना विकसित होती है – हम बिना किसी स्वार्थ के दूसरों की सहायता करना सीखते हैं।
• व्यक्तित्व का विकास होता है – नेतृत्व, आत्मविश्वास और टीम वर्क की आदतें मजबूत होती हैं।
• समाज के प्रति जागरूकता बढ़ती है – हमें वास्तविक सामाजिक समस्याओं की समझ विकसित होती है।
• राष्ट्र निर्माण में योगदान – छोटी-छोटी सेवाएँ मिलकर देश को मजबूत और एकजुट बनाती हैं।
• भविष्य के अवसर बढ़ते हैं – एन.एस.एस. में सक्रिय भागीदारी हमारे व्यक्तित्व को निखारती है, जिससे हमें करियर में बेहतर अवसर मिलते हैं।
एन.एस.एस. शिविरों का आयोजन क्यों जरूरी है?
• व्यावहारिक शिक्षा मिलती है – शिविरों के माध्यम से हम समस्याओं को हल करने का वास्तविक अनुभव प्राप्त करते हैं।
• समाज से सीधा जुड़ाव होता है – ग्रामीण और जरूरतमंद लोगों के साथ समय बिताकर हम उनकी आवश्यकताओं को समझ सकते हैं।
• एकता और अनुशासन की सीख मिलती है – कठिन परिस्थितियों में मिलकर काम करने की आदत बनती है।
• जीवन उपयोगी कौशल सीखे जा सकते हैं – प्राथमिक उपचार, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, और जागरूकता अभियान जैसे कार्यों का ज्ञान बढ़ता है।
• स्थायी प्रभाव छोड़ता है – शिविरों में किए गए कार्य, जैसे स्वच्छता अभियान और साक्षरता कार्यक्रम, समाज को दीर्घकालिक लाभ पहुँचाते हैं।
**मेरे द्वारा आयोजित सात दिवसीय एन.एस.एस. शिविर*
हाल ही में, हमने सात दिवसीय एन.एस.एस. शिविर आयोजित किया, जिसमें छात्रों ने पूरे जोश के साथ भाग लिया और समाज सेवा का अनुभव लिया। इस शिविर में सफाई अभियान, स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम, वृक्षारोपण, जल संरक्षण कार्यशाला, आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण और साक्षरता अभियान जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए।
हमने ग्रामीण लोगों से मिलकर उनकी समस्याओं को समझा और समाधान खोजने का प्रयास किया। इस शिविर का सबसे बड़ा लाभ यह था कि छात्रों को अपनी क्षमताओं का अहसास हुआ और वे समाज के प्रति अधिक संवेदनशील बने। सेवा की यह भावना उनके जीवन में आगे भी बनी रहेगी।
अंत में यही कहूँगा
“हर हाथ को कुछ काम मिले,
हर दिल में सेवा का नाम जले।
समाज के संग जो चलता है,
सच्चे सुख का हक़दार वही बनता है।”
एन.एस.एस. केवल सेवा का कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्वयं को निखारने और समाज को सशक्त बनाने का एक जरिया है। एन.एस.एस. शिविर हमें व्यवहारिक ज्ञान देते हैं और समाज से सीधे जुड़ने का अवसर प्रदान करते हैं। इसलिए, हमें एन.एस.एस. को बढ़ावा देना चाहिए और नियमित रूप से शिविरों का आयोजन करना चाहिए, ताकि युवा पीढ़ी समाज सेवा के इस महत्वपूर्ण पहलू को समझ सके और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे सके।