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उधमसिंह नगर

ऊधमसिंहनगर में रजिस्ट्रियां बंद से रियल स्टेट के कारोबार में आई मंदी।प्रोपर्टी डीलरो परेशान,गरीब व मध्यम वर्ग का टूट रहा घर बनाने का सपना।सरकार को राजस्व का भी नुक्सान होने की खबर 

रुद्रपुर(खबर धमाका)‌‌। ऊधमसिंहनगर प्रशासन द्वारा पिछले तीन माह से सैकड़ों कालौनियों की रजिस्ट्री पर लगाई गई रोक से जहां प्रोपर्टी डीलर परेशान हैं,तो गरीब व मध्यम वर्ग के लोगों का घर बनाने का सपना टूट रहा है, खबर यह भी कि इससे सरकार को राजस्व का बड़ा घाटा हो रहा है।

ऊधमसिंहनगर में प्रोपर्टी से जुड़े लोगों की मानें तो प्रशासन ने जनपद की सैकड़ों उन कालौनियो की रजिस्ट्री पर रोक लगा दी है, जिनमें गरीब व मध्यम वर्ग के लोगों को आसानी से घर बनने का प्लांट मिल रहा था, रजिस्ट्री पर रोक लगने से गरीब व मध्यम वर्ग के लोग परेशान हैं।जिन कालौनी की रजिस्ट्रियों पर रोक लगाई गई है, उनमें काफी ऐसी कालौनी भी है,जो जिला स्तरीय विकास के अस्तित्व में आने से पहले की है।

जानकारों की मानें तो जनपद में रेरा से स्वीकृत कम ही कालौनियो है, जिनमें यदि कोई व्यक्ति घर बनाने का सपना देखता है तो उसके पास 50 लाख का इंतजाम होना चाहिए, क्योंकि रेरा से स्वीकृत कालौनियो में 30 से 50 हजार रुपए वर्ग गज के रेट है, ऐसे गरीब और मध्यम वर्ग इन कालौनियो में घर बनने का सपना भी नहीं देख सकता है,वहीं जो कालौनी जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण से पहले की है,तो कई कालौनिया ग्रामीण क्षेत्रों में है,जहां पर प्राधिकरण लागू नहीं होता, इसके बाद भी प्रशासन ने इन कालौनियो की रजिस्ट्री पर रोक लगा रखी है,इन कालौनियो में जमीन का रेट आठ से दस हजार रुपए के करीब है,यानि इन कालौनियो में गरीब ,मध्यम वर्ग घर बनाने का सपना देख सकता है, लेकिन प्रशासन की तरफ लगाई गई रोक से उनका सपना टूटने लगा है।

रुद्रपुर उप निबंधक कार्यलय परिसर में दस्तावेज लेखक एडवोकेट अशोक सागर की मानें तो प्रशासन की सख्ती के बाद जमीन की खरीद फरोख्त के मामलों में अस्सी प्रतिशत तक की कमी आई है,श्री अशोक बताया कि पहले अकेले उनके विस्तार से ही 100 के करीब रजिस्ट्रियां प्रतिदिन होती थी, जबकि अब यह आंकड़ा 10-15 तक सिमट कर रह गया है। रुद्रपुर उप निबंधक कार्यालयों से जुड़े सूत्रों की मानें तो पिछले कुछ दिनों से रजिस्ट्रियों का यह आंकड़ा प्रतिदिन 50 के आस-पास सिमट कर रह जा रहा है, जबकि पहले प्रतिदिन यह। आकांडा 400-500 के बीच पहुंच जाता था।