उत्तराखंड

कांग्रेस,जहां पार्टी नहीं, सिर्फ अपने बारे में सोचते हैं नेता!भुल्लर की दावेदारी,गाबा एंड समर्थकों पर बेहड का मास्टर स्ट्रोक। उत्तराखंड में कांग्रेस का संगठनात्मक नियुक्तियां भी लटकी 

नरेन्द्र राठौर(खबर धमाका)। उत्तराखंड में पहले ही गुटबाजी के चलते हाशिये की तरफ बढ़ रही कांग्रेस संगठनात्मक नियुक्तियां के मामले में बाहर नहीं निकल पा रही है। गुटबाजी इस कदर है,कि हर कोई अपने विरोधियों को निपटाने में जुटा है। ऊधमसिंहनगर में इसका बड़ा उदाहरण समाने आ रहा है।

उत्तराखंड की बात करें यहां पर कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी कुर्सी की जंग होती है। राज्य बनने के बाद से दोनों दलो को जनता बारी-बारी से मौका दे रही थी, लेकिन 2022 में इसका मिथक टूट गया, भाजपा को जनता दूसरी बार कुर्सी पर बैठा दिया,2022 के चुनाव में भी कांग्रेस भाजपा की जगह गुटबाजी के चलते जनता का दिल नहीं जीत पाई।अब 2027 के चुनाव से पहले चल रही संगठनात्मक नियुक्तियां में भी गुटबाजी और अपने विरोधियों को निपटाने की पूरी कसरत हो रही है।

ऊधमसिंहनगर की बात करें जिलाध्यक्ष हिमांशु गाबा और पूर्व मंत्री तिलक राज बेहड में छत्तीस का आकांक्षा है।इसके उदाहरण समय समय पर समाने आए हैं। ऐसे पर पूर्व मंत्री व किच्छा विधायक तिलक राज संगठनात्मक नियुक्तियां में गाबा को निपटाने के लिए पूरा जोर लगा रहे। पिछले माह हुई संगठनात्मक नियुक्तियां की रायसुमारी में तो पर्यवेक्षकों के समाने ही जूतम पैजार ने पार्टी की जमकर फजीहत कराई थी। जैसे तैसे यह मामला शांत हुआ था,तो अब बेस्ड के करीब मानें जा रहे युवा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष सुमित भुल्लर ने अचानक जिलाध्यक्ष पद की दावेदारी पेश करके इसपर बहस छेड़ दी।यह सवाल इसलिए उठ रहे क्योंकि पिछले माह हुई रायसुमारी के दौरान सुमित भुल्लर ने पर्यवेक्षकों के समाने कोई दावेदारी पेश नहीं की थी। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस हाईकमान ऊधमसिंहनगर में जिलाध्यक्ष के पद पर फिर हिमांशु गाबा के नाम मुहर लगाकर उत्तराखंड में सभी जिलाध्यक्ष की लिस्ट जारी करने वाला था,यदि ऐसा होता तो फिर इसका हिमांशु की जीत और बेहड की हार के रुप में विश्लेषण किया जाता। ऐसे लिस्ट जारी होने से पहले बेहड ने मास्टर स्ट्रोक खेलते हुए सुमित भुल्लर को मैदान में उतारा दिया। माना जा रहा सुमित भुल्लर मंदिर ऊधमसिंहनगर कांग्रेस के जिला अध्यक्ष बने तो फिर हिमांशु गाबा एंड पार्टी का पूरी तरह सफाया कर दिया जायेगा, जनपद में सभी इकाइयों पर फिर सुमित और बेहड के क़रीबियों का ही होगा।

ऐसे में कांग्रेस के समाने जीतकर भी हारने स्थिति पैदा होनी निश्चित है।

हालांकि अभी कमान हाईकमान के हाथों में, लेकिन जिस तरह 2027 से पहले कांग्रेस में गुटबाजी और दिग्गज नेता पार्टी से ज्यादा अपना भला करने की कोशिश में लगे हैं, उससे वह जनता का कितना भरोसा जीत पायेंगे यह आने वाला समय बताएगा।