रुद्रपुर में तीन दिवसीय कुमाऊं भाषा सम्मेलन आयोजित पूर्व मुख्यमंत्री कोश्यारी ने किया शुभारंभ, प्रदेशभर के बुद्धिजीवी, साहित्यकार और कवि हुए शामिल

रुद्रपुर(खबर धमाका)। कुमाऊँ की समृद्ध भाषा, साहित्य और संस्कृति को संरक्षण और प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय कुमाऊँनी भाषा सम्मेलन का शुभारंभ जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) सभागार में हुआ। कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन पूर्व मुख्यमंत्री एवं महाराष्ट्र और गोवा के पूर्व राज्यपाल प्रो- भगत सिंह कोश्यारी ने दीप प्रज्वलित कर किया। यह ऐतिहासिक आयोजन उत्तराखण्ड भाषा संस्थान देहरादून, कुमाऊँनी पत्रिका ‘पहरू’, कुमाऊँनी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति प्रचार समिति, तथा संस्कृति विभाग उत्तराखण्ड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया है। उद्घाटन अवसर पर आयोजन समिति ने मुख्य अतिथि प्रो- कोश्यारी सहित अन्य अतिथियों का पारंपरिक स्वागत किया और उन्हें स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया। सभागार कुमाऊँनी लोकसंगीत की मधुर ध्वनियों और पारंपरिक परिधानों से सजे प्रतिभागियों की उपस्थिति से लोकसंस्कृति की जीवंत छवि में डूबा दिखाई दिया।


मुख्य अतिथि भगत सिंह कोश्यारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि कुमाऊँनी भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी पहचान, इतिहास और संस्कारों की जीवित विरासत है। उन्होंने कहा, किसी भी समाज की आत्मा उसकी मातृभाषा में बसती है। जब भाषा जीवित रहती है तो संस्कृति स्वतः सुरक्षित रहती है। कुमाऊँनी भाषा हमारी पीढ़ियों की धरोहर है और इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सबका दायित्व है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाषा केवल बोलचाल का माध्यम नहीं, बल्कि एक ऐसी जीवनधारा है जो हमारी संवेदनाओं, परंपराओं और रचनात्मकता को जोड़ती है। उन्होंने युवाओं से आ“वान किया कि वे डिजिटल युग में कुमाऊँनी भाषा को सोशल मीडिया, सिनेमा और संगीत के माध्यम से लोकप्रिय बनाने में योगदान दें। उद्घाटन सत्र में विशेषज्ञों और भाषा प्रेमियों ने कुमाऊँनी भाषा की प्राचीनता, साहित्यिक परंपरा और सांस्कृतिक योगदान पर गहन विमर्श किया। वक्ताओं ने कहा कि यह भाषा लोकगीतों, कथाओं, कहावतों और लोकसंस्कृति के रूप में आज भी जन-जन के जीवन का हिस्सा है। दस अवसर पर कुमाऊँनी लोक साहित्य, संगीत, लोक वाद्य, रंगमंच, सिनेमा और सोशल मीडिया की भूमिका पर विस्तृत परिचर्चा हुई। इस दौरान विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्रओं और लोक कलाकारों ने कुमाऊँनी संस्कृति पर आधारित रंगारंग प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें पारंपरिक नृत्य, झोड़ा- छपेली और लोकगीतों की गूंज से सभागार मंत्रमुग्ध हो उठा। सम्मेलन के मीडिया प्रभारी डॉ- के-सी- चंदौला ने बताया कि इस आयोजन के मुख्य प्रायोजक चंदौला होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज और वसुंधरा नर्सिंग कॉलेज हैं। उन्होंने कहा कि रुद्रपुर जैसे औद्योगिक शहर में कुमाऊँनी भाषा पर आधारित इतना बड़ा आयोजन पहली बार हो रहा है, जिससे क्षेत्र में लोकभाषा के पुनर्जागरण का संदेश जाएगा। कार्यक्रम में संयोजक डॉ- बी-एस- बिष्ट, सह-संयोजक डॉ- एल-एम- उप्रेती, हयात सिंह रावत, डॉ- किशोर चंदौला, भरत लाल शाह, लक्ष्मी चंद्र पंत, आनंद सिंह धामी, हेम पंत, महेश चंद्र जोशी, रमेश चंद्र जोशी, महेंद्र ठकुराठी सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविद, लेखक, कलाकार और भाषा प्रेमी उपस्थित रहे
