उधमसिंह नगर

आखिर खाकी पर क्यों डाला जाता अन्य विभागों का बोझ। कानून व्यवस्था बनाने का काम के लिए तैनात पुलिस अन्य विभागों के काम से हो रही परेशान। विभाग के अधिकारियों को करना होगा मंथन। ज्यादा काम करने से चिड़चिड़ापन से भी हो रहे ग्रस्त

नरेन्द्र राठौर

रुद्रपुर (खबर धमाका)। उत्तराखंड में पुलिस इस समय अपने अपने मूल काम की जगह दूसरे विभागों के काम करके थक चुकी है। सत्यापन, अतिक्रमण हटाना,अवैध शराब पकडना हो या अन्य काम,जहां देखो पुलिस को जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। ऐसे में एक पुलिस वाला दूसरे विभाग का काम करें या फिर कानून व्यवस्था को सही करें यह अपने आप में सवाल है।

उत्तराखंड हो या फिर कोई अन्य राज्य पुलिस का काम कानून व्यवस्था संभालने का होता है,जैसे कहीं मारपीट,दंगा,चोरी, डकैती हत्या जैसे घटनाओं को रोकना और फिर घटना करने वालों को पकड़कर कोर्ट में पेश करना। लेकिन पिछले कुछ दिनों से पुलिस अपने इस काम के साथ ही कई अन्य कामों से भी दबी हुई है। उदाहरण के शहरों में सड़क किनारे हुई अस्थाई अतिक्रमण,जैसे फड,ठेली लगाने वालों को हटाना है,तो यह काम पुलिस को ही करना है, जबकि यह सड़कों पर अतिक्रमण करने वाले से टैक्स वसूली नगर निगम करता है, उन्हें हटाने का काम भी नगर निगम का है, लेकिन यह काम निगम नहीं करता है, ऐसे ही सत्यापन अभियान, प्रशासन चाहे तो इसे आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां या अन्य विभागों से क्या सकता है‌। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के पास पूरे क्षेत्र की सूची भी होती, लेकिन यह सत्यापन का नबंर आता है तो फिर पुलिस को ही लगा दिया जाता है। अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगाने के लिए आबाकारी विभाग मौजूद हैं, अवैध खनन रोकने के लिए खनन विभाग, ओवरलोडिंग रोकने को आरटीओ विभाग मौजूद हैं।  लेकिन इस काम को रोकने की जिम्मेदारी भी पुलिस की है। सवाल यह उठता है की जब दूसरे विभाग बकायदा इसके लिए बने हैं तो फिर अधिकारी पुलिस से ही इन कामों में क्यों क्या रहे।। जबकि उत्तराखंड में पुलिस बल की पहले से ही भारी कमी है। थाने चौकियों में तैनात पुलिस कर्मी 24-24 घंटे काम कर रहे हैं,वह अपने मूल काम को करें या फिर दुसरे विभाग के काम। हमारी फील्ड में की पुलिस कर्मियों से इसको लेकर बात भी हुई, जिसमें उन्होंने नाम न छापने की सर्त पर अपने मन की पीड़ा खुलकर बताई। उन्होंने कहा की,एक तो उन्हें घटनाओं के खुलासे, फिर उनकी जांच और रिर्पोट तैयार करनी होती है, दूसरी तरफ सत्यापन, अतिक्रमण हटाने,नशे का करोबार बंद कराने जैसे कामों में भी लगा दिया जाता है। विभाग के अधिकारियों को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। क्योंकि थानों और चौकियों में काम करने वाले भी इंसान हैं। उनके काम करने की भी सीमा होती है। इधर थानों और चौकियों में तैनात पुलिस कर्मियों पर अक्सर लोग अभद्रता,काम न करने के आरोप भी लगाते हैं,इसके पीछे भी कहीं न कहीं ज्यादा काम होने की बजह से उनके अन्दर चिड़चिड़ापन से ग्रस्त होना मुख्य बजह है। अधिकारियों को अपने कर्मचारियों पर दबा बनाने से पहले दूसरे विभाग जो इसी काम के लिए गठित हुए हैं, उनसे भी सवाल पूछना चाहिए।