अधिकारियों की नासमझी,या सरकार को बदनाम करने की साज़िश!लैंड जिहाद का सफाया करने उतरी धामी सरकार का मिशन सिस्टम ने कर दिया फेल। विपक्ष तो विपक्ष अपने ही करने लगे विरोधी। जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जरूरत।

नरेन्द्र राठौर

रुद्रपुर (खबर धमाका)। विधानसभा में लव जिहाद,लैंड जिहाद को उठाकर हीरों बने रुद्रपुर विधायक शिव अरोरा को मिल रहा श्रेय लेने की होड़ में लगे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मिशन बिना होमवर्क के शुरू हुआ है,या फिर किसी मिशन को सफल बनाने के लायक उनके अधिकारी नहीं है। यह सवाल ऊधमसिंहनगर और नैनीताल में चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान खड़ा हो गया। कोई इसे धामी सरकार को बदमाश करने की साज़िश बता रहा तो कोई इसे अधिकारियों का अपने अधीनस्थों पर अंकुश नहीं है,यह कहता नजर आ रहा।कारण जो भी हो धामी सरकार के मिशन लैंड जिहाद को दोनों जिलों में सिस्टम ने पलीता लगा दिया। सिस्टम को जो काम धामी सरकार ने सौंपा था वह उससे पूरी तरह भटक गया। यही कारण है,की विपक्ष कम और सत्तापक्ष अतिक्रमण हटाओ अभियान से ज्यादा नाराज़ हैं।
दो दिन पहले आपने केन्द्रीय रक्षाराज्यमंत्री और नैनीताल -ऊधमसिंहनगर के सांसद अजय भट्ट का बयान जरुर पड़ा होगा। उन्होंने दोनों जिलों में चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान में सिस्टम द्वारा किए जा रहे कारनामों पर खुलकर टिप्पणी की थी, उन्होंने कहा की धामी सरकार ने धार्मिक आधार पर सरकारी जमीन पर कब्जे करने वालों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, लेकिन प्रशासन वर्षों से सरकारी,खत्तों,नगर के किनारे रह रहे लोगों को परेशान कर रहा, उन्हें नोटिस देकर एक तरह का दहशत फैलने वाला हूमर फैलाया जा रहा है,जो ठीक नहीं है, जसपुर से कांग्रेसी विधायक आदेश चौहान ने तीन दिन पहले डीएम से मुलाकात करके ऐसे ही आरोप लगाया थे, उन्होंने कहां की एसडीएम डीएम की बात नहीं मानती, डीएम के आदेश के बावजूद उन्होंने 1980 में मिले पट्टों की जमीन पर बसे लोगों के घरों पर जेसीबी चलवा दी, उन्होंने कहा की प्रशासन जानबूझकर ऐसे लोगों से बदला ले रहा,जो जनहित की लडाई लड़ते रहे। कांग्रेस विधायक चौहान के बयान को भले ही भाजपा विपक्षी होने का वाहन करके टाल दें, लेकिन उनका आरोप खारिज नहीं किया जा सकता।
रविवार को किच्छा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने भी प्रभारी डीएम विशाल मिश्रा से मुलाकात करके कुछ ऐसे ही संगीन आरोप अपनी ही सरकार के अधिकारियों पर लगाए हैं। विरोध करने सभी नेता यह कहते रहे कि उन्हें तालाब, सड़कों और धार्मिक आधार पर जमीन कब्जाने वालों पर कार्रवाई से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन प्रशासन यह न करके उन लोगों को परेशान कर रहा है,जिनका इन तीनों मुद्दों से कोई सरोकार नहीं है।
सूत्रों की मानें तो ऊधमसिंहनगर वर्षों से रह रहे लोगों को एक मिशन के तहत परेशान करने का काम हो रहा,वहीं धामी सरकार का अतिक्रमण हटाओ अभियान के जो मिशन है,उसपर काम नहीं हो रहा। पूरे जिले में प्रशासन के पास ऐसा कोई सबूत नहीं, जिससे धामी सरकार का मिशन पूरा होता है,2024 में लोकसभा चुनाव है,जिस प्रकार सिस्टम काम कर रहा,यदि इसी प्रकार जारी रहा तो इसका असर चुनाव में भी देखने को मिलेगा,
फिलहाल कारण जो भी ऊधमसिंहनगर और नैनीताल में धामी सरकार का मिशन अतिक्रमण विवादों में घिर गया है, जिसके लिए पूरी तरह दोनों जिलों के डीएम जिम्मेदार है। सरकार को जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत है।
