रुद्रपुर का रण,जो जीतेगा वही बनेगा सिकंदर।कांग्रेस के पास मौका,मगर गुटबाजी चरम पर।भाजपा ने विकास के लिए झोंकी पूरी ताकत।जनता खामोश,बड़े बड़े दिग्गज नहीं कर पा रहे आकलन
नरेन्द्र राठौर(खबर धमाका)। रुद्रपुर में महापौर पद पर कब्जा करने के लिए चुनाव अब पूरे शबाब पर पहुंचे लगा है,एक तरफ कांग्रेस लंबे समय बाद वापसी ,तो भाजपा हैट्रिक लगाने के लिए जोर लगा रही है,अब ऊंट किस करवट बैठेगा यह जनता ही तय करेंगी।
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रुद्रपुर नगर निगम का प्रदेश में अपना अलग महत्व है, देहरादून के बाद रुद्रपुर पर सबकी नजर रहती है, ऐसे में रुद्रपुर में महापौर किसका बने इसको लेकर भी कांग्रेस और भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है।
दोनों पार्टियों की मजबूती की बात करे तो भाजपा के पास बड़ा बूथ लेबल तक संगठन। प्रदेश में भाजपा की सरकार है, विधायक और सांसद भी भाजपा के है। इसके लिहाज से कांग्रेस कहीं ठहरती नजर नहीं आ रही है, चुनाव जनसंपर्क में भी इसका पूरा असर देखा जा रहा है। भाजपा की अलग-अलग टीमें लगातार जनसंपर्क कर रही है,यह तक के अब भाजपा की टीमों ने लोगों की रसोई तक भी पहुंचना शुरू कर दिया है। दूसरी तरफ कांग्रेस की बात करें तो कांग्रेस के पास संगठन महज दिखावेभर का है, उसमें भी फूट पड़ी है, लेकिन किच्छा के विधायक तिलक राज बेहड ने कांग्रेस प्रत्याशी के लिए मैदान में उतरकर भाजपा के समीकरण बिगाड दिए हैं। कांग्रेस प्रत्याशी मोहन लाल खेड़ा का पूरा परिवार भी चुनाव मैदान में उतर आया है। भाजपा के खिलाफ एंटी इनक्मवेंशी भी नजर आ रही है।
पिछले दो चुनावों की बात करें तो हार और जीत बहुत बढ़ा अंतर नहीं रहा है। ऐसे यदि मतदाताओं में जो नाराजगी देखी जा रही है,वह अंत तक बनी रही तो फिर कांग्रेस प्रत्याशी मोहन खेडा भाजपा के हैट्रिक लगाने के सपने को तोड़कर कुर्सी पर काबिज हो सकते हैं।
लेकिन फिलहाल अधिकांश मतदान खामोश नजर आ रहा है,जिससे दोनों पार्टियां परेशान हैं,बड़े बड़े दिग्गज समझ नहीं पा रहे की चुनावी रण में कौन मजबूत है, कांग्रेस वापसी करेगी या फिर भाजपा हैट्रिक लगाने में कामयाब हो जायेगी,इसका आंकलन अभी कोई भी नहीं कर पा रहा है।