उधमसिंह नगर

दल बदल के दल-दल में फंसे गंगवार परिवार पर संकट के बादल। अपने स्वार्थ के लिए नीतीश की तरह बदलते हैं पार्टियां‌। जिला पंचायत अध्यक्ष तो दूर सदस्य पद पर भी मंडरा रहा खतरा।

रुद्रपुर(खबर धमाका)। उत्तराखंड में चल रहे पंचायत चुनाव में ऊधमसिंहनगर जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर कौन काबिज होगा इसको लेकर चर्चाओं का बाजार पूरी तरह गर्म है। माना यह जा रहा कि कुरैया सीट चुनाव लड रही भाजपा समर्थित प्रत्याशी कोमल चौधरी इस सीट पर बैठ सकती है। हालंकि इसके लिए उन्हें अभी सदस्य पद के चुनाव जीतना होगा,जो डेरी खीर है।
इधर उत्तराखंड गठन के बाद लगातार जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर कब्जा जमाने बैठे गंगवार परिवार के लिए अपनी कुर्सी बचाना चुनौती बन गई है। इसके एक दो नहीं कई कारण हैं।एक तो उन्होंने कुर्सी के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों का भरोसा खो दिया है। यानी कुर्सी के लिए गंगवार परिवार का हाल बिहार के नीतीश कुमार से पीछे नहीं है। उन्होंने 2017 से पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा तो इसके बाद 2022 से पहले फिर कांग्रेस में शामिल हो गए।इधर 2022 में जब भाजपा की सरकार बनी तो फिर उनका मन डोलने लगा, इसके बाद 2024 का लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने फिर कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया,हालिकी भाजपा में उनकी वापसी को लेकर पार्टी के कुछ नेता ही विरोध कर थे।इधर भाजपा में आने के बाद गंगवार परिवार भाजपा के ही नेताओं को निशाना बनाता रहा, पंचायत चुनाव के दौरान उन्होंने भाजपा सरकार पर भी तोहमत मंडने से गुरेज नहीं किया। शायद इसलिए पार्टी ने जिस सीट से गंगवार परिवार ने दावेदारी ठोकी उस सीट पर उन्हें समर्थन देने से हाथ खड़े कर दिए।इधर जिला पंचायत पर पिछले 20 वर्ष से काबिज गंगवार परिवार की उपलब्धि की बात करें तो सिर्फ शून्य से ज्यादा कुछ नहीं है,यानि की जिला पंचायत अध्यक्ष रहते हुए गंगवार परिवार ने सिर्फ अपना विकास किया है।इधर लगातार नीतीश कुमार की तरह दल-बदल कर रहे गंगवार से अब कांग्रेस का भरोसा भी उठ चुका है। पिछले सप्ताह कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष करन मेहरा ने मीडिया के सवाल पर साफ कहा कि स्वार्थ की राजनीति करने वालों को कांग्रेस कभी भी न तो गले लगायेंगी और न ही समर्थन देगी। यानी की गंगवार परिवार के लिए एक तरफ कुआं और दूसरी तरफ खाई है।
जिस सीट से गंगवार परिवार ने इस बार दाबा ठोका उस सीट पर उनके मुकाबले कई दावेदार खड़े हुए हैं और उन्हें सीधी चुनौती दे रहे हैं। वह की जनता पिछले कार्यकाल के दौरान की गई बादाखिलाफी से पहले ही नाराज़ हैं। ऐसे गंगवार परिवार धनबल से ही वह पर जीत दर्ज करने की उम्मीद लगाए बैठा है।
फिलहाल चुनाव परिणाम के बाद क्या होगा यह समय बताएगा, लेकिन दल-बदल के दल-दल में फंसे गंगवार परिवार की राह आसान नहीं है। सदस्य पद के लिए उनकी सीट के जहां मतदाता सबक सिखाने की तैयारी कर रहे हैं,तो उनके राजनीतिक विरोधी भी कमर कसे बैठे हुए हैं।