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वकीलो ने की पंजीयन कार्यालय को मूल कार्यालय में शीघ्र स्थापित कराने की मांग।

रुद्रपुर(खबर धमाका)। नवीनीकरण कार्य पूर्ण होने के पश्चात भी पंजीयन कार्यालय को मूल कार्यालय एआईजी परिसार कलेक्ट्रेट में स्थापित न किये जाने से नाराज अधिवक्ता एसोसिएशन रूद्रपुर के तमाम अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी को पत्र सौंपकर अति शीघ्र दफ्तर को मूल दफ्तर में स्थापित कराने की मांग की।

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अधिवक्ता एसोसिएशन के अध्यक्ष विरेन्द्र कुशवाहा ने बताया कि एआईजी स्टाम्प न्यायालय परिसार में प्रथम तल पर उप निबंधक कार्यालय स्थापित है, वर्तमान में जिले में सभी पंजीयन कार्यालयों की बिल्डिंग की मरम्मत व नवीनीकरण का कार्य चल रहा है जिसके चलते 01 जुलाई 2024 को कुछ माह के लिए पंजीकरण कार्यालय को किच्छा बाईपास रोड स्थित जर्जर सूचना भवन की बिल्डिंग में संचालित करने के लिए ले जाया गया था, जिसे आज डेड़़ वर्ष से भी अधिक का समय हो चुका है तथा मूल कार्यालय की मरम्मत व नवीनीकरण का कार्य भी कई माह पूर्व पूर्ण हो चुका है, बावजूद इसके मूल दफ्तर में स्थापित नहीं किया जा रहा है, जिस कारण अधिवक्ताओं व पक्षकारों को परेशानी हो रही है, क्योंकि अधिवक्ताओं के चैंबर एआईजी न्यायालय कलेक्ट्रेट में मूल पंजीयन कार्यालय में है, तहसील भी कलेक्ट्रेट में है जबकि खतौनी तहसील से ही प्राप्त होती है और पंजीयन से संबंधित दस्तावेजों को अधिवक्ता तैयार करते हैं उसके बाद पक्षकारों को लगभग 03 किलो मीटर की दूरी तय करके वर्तमान में संचालित कार्यालय किच्छा बाईपास रोड जाना होता है, भारी जाम का सामना करना पड़ता है, कई बार लेखन में कुछ त्रुटि रहे जाने के कारण पुनः 03 किलो मीटर दूर चैंबरों में सही करने आना होता है, मार्ग में अत्यधिक जाम होने के कारण दुर्घटना का भी भय बना रहता है साथ ही समय की भी बरबादी होती है। उन्होंने बताया कि पंजीकरण कार्यालय में 3ः30 बजे तक दस्तावेजों को प्रस्तुतिकरण का समय निर्धारित है, कार्यालय अधिक दूर होने के कारण कई बार दस्तावेजों को तैयार करके ले जाने में देरी हो जाने के कारण पक्षकारों के दस्तावेजों का पंजीकरण उस दिन नहीं हो पाता है, कुछ पक्षकार अन्य राज्य से लंबी दूरी करके आते हैं जिन्हे मजबूरन अगले कार्यदिवस का इंतजार करना पड़ता है, जिसकरण पक्षकारो के समय एवं धन दोनों की हानि होती है। इस दौरान अध्यक्ष विरेन्द्र कुशवाहा, सचिव मनीष मित्तल, एडवोकेट राजीव सक्सेना, अशोक सागर, गुरदीप सिंह, शावेज अहमद, प्रमोद मित्तल, अशोक चन्द, जगदीश सागर, शुभम पाल, महिपाल सिंह, अरूण जुनेजा, रोहित राठौर, नितिन राठौर, उदय राठौर, रोहित चन्द्र गढ़कोटी सहित अधिवक्ता मौजूद थे।