उत्तराखंड

तो पूर्व विधायक शुक्ला के लिए बज गई एक और खतरे की घंटी।बेहड और विकास के प्रेम मिलाप के निकाले जा रहे कई मायने।चर्चा सही है तो फिर शुक्ला का होगा बड़ा नुक्सान। 

नरेन्द्र राठौर(खबर धमाका)। कहते हैं कि राजनीतिक में सब कुछ स्थाई नहीं होता है।आप जो सोच रहे,विशात बिछा रहे हैं,वह जरुरत पर धरातल पर उतरेगी है,यह भी सोचना बेमानी है। क्योंकि यह सब आप कि ताकत,पकड़ और सम्भावनाओं पर चलते हैं।

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ताज़ा मामला किच्छा विधानसभा से जुड़ा है। शुक्रवार को हरित क्रांति की जनक पंतनगर यूनिवर्सिटी से एक video और फोटो वायरल होने के बाद राजनीतिक में हंगामा मचा हुआ है। आम जनता इसपर अपने अपने हिसाब से कमेंट कर रही है,तो राजनीति के बड़े दिग्गज खामोश है।

वायरल वीडियो और फोटो को लेकर इतना घमासान क्यों मचा है,इसके पीछे कई वजह है,और इसका 2027 चुनाव से भी सीधा सम्बन्ध है,यह कहें तो ग़लत नहीं होगा।

किच्छा विधानसभा की बात करें तो 2022 में मैदान में उतरे पूर्व मंत्री ने तत्कालीन विधायक शुक्ला को 14 हजार वोटों से हराकर उनसे विधायकी छीन ली थी। इसके बाद दोनों के बीच सह और मात का खेल चलता रहा है, विधायक बेहड अपनी विकास की सोच से जहां किच्छा में मजबूत पकड़ बनाते चले गए तो शुक्ला कमजोर होते नजर आए।निकाय चुनाव में शुक्ला ने रुद्रपुर के महापौर का चुनाव लड़ें विकास शर्मा का हाथ इस मंशा के साथ पकड़ लिया,कि विकास मेयर बने तो उन्हें नगर निगम में पड़ने वाले विधानसभा के वोटों का फायदा होगा। विकास भी महापौर बनने के बाद बेस्ड के खिलाफ लगातार आग उगल रहे थे। पंचायत चुनाव में तो उनके भाषण काफी सुर्खियों में रहे थे।बेहड भी जबाब देने में उनसे पीछे नहीं रहे। दोनों के भाषणों से ऐसा माना जा रहा कि इसका फायदा शुक्ला को मिलेगा। लेकिन पंचायत चुनाव में तिलक राज बेहड ने अपनी ताकत का एहसास करा दिया, किच्छा विधानसभा की तीनों सीटें उन्होंने भाजपा से छीन ली। इसके बाद शुक्ला ने ब्लाक प्रमुख चुनाव में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी की जगह निर्दलीय प्रत्याशी को खुलकर सर्पोट करके अपनी छीछालेदर करा ली,जो अब तक उनकी फजीहत करा रही हे।दो बीडीसी मेंम्बर उनपर गंभीर आरोप लगा चुके हैं। इसका असर सीछे शुक्ला की छबी को कमजोर करते नजर आ रहे हैं।

इधर लगातार समाने आ खबरें कहीं न कहीं इस तरफ इशारा कर रही थी कि बेहड से पार पाने के लिए भाजपा को किच्छा में ने प्रत्याशी की जरुरत पड़ेगी है।इसके पीछे एक मिथ्या भी है कि शुक्ला कभी भी बेहड दीवार को पार नहीं कर पाए हैं। रुद्रपुर विधानसभा में वह बेहड के खिलाफ की बार चुनाव लड़ें थे, लेकिन उन्हें हार ही मिली थी,2022 में किच्छा विधानसभा में वही हुआ।

ऐसे 2027 के चुनाव से पहले भाजपा कोई रिस्क लेगी इसकी सम्भावना भी कम ही।

पंतनगर यूनिवर्सिटी में शुक्रवार को बेहड और विकास शर्मा के प्रेम मिलाप को भी इससे जोड़कर देखा जा रहा है।मंच पर जिस प्रकार दोनों आपस में वार्ता कर रहे थे उससे एक बात तो साफ दोनों ने अपने पुराने मनमुटाव को भुला दिया है। दोनों को मिलने में कहीं न कहीं सीएम पुष्कर सिंह धामी की भी भूमिका साफ आ रही है। चर्चा यह भी कि बेहड भाजपा ज्वाइन भी कर सकते हैं, हालंकि यह चर्चाएं लंबे समय से चलती रही है।                                           जो भी हो किच्छा के पूर्व विधायक शुक्ला के लिए यह अच्छे संकेत नहीं है।2027 में जो वह उम्मीद पाले बैठे हैं, वह ओझल होती नजर आ रही है, माना जा रहा कि जिसके कहीं न कहीं वह खुद भी जिम्मेदार है।अब उनकी किस्मत और भाग्य ही उनके लिए नया सबेरा लेकर आ सकता है