श्री राम कथा के दूसरे दिन आज कथावाचक आचार्य श्री शांतिनी जी महाराज ने प्रभु श्री रामचंद्र जी की जन्म की कथा सुनाइए.

रुद्रपुर(खबर धमाका)। मोक्षदानी श्री राम कथा के आज दूसरे दिन प्रयागराज से पधारे आचार्य श्री शांतनु जी महाराज ने श्री रामचंद्र जी की जन्म की कथा सुनाई आचार्य ने कथा सुनाते समय कहा की , रामचंद्र जी भगवान विष्णु जी का सातवां अवतार माने जाते हैंl श्रीराम को धरती पर मर्यादा का संदेश देने के लिए भेजा गया था। इसलिए उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम के नाम से भी जाना जाता है।भले ही श्रीराम अवतारी पुरुष थे लेकिन उन्होंने सांसारिक प्रक्रिया के तहत अपनी मां की कोख से जन्म लिया था। श्रीराम अयोध्या के राजा राजा दशरथ और उनकी पत्नी कौशल्या के पुत्र थे। दरअसल, राजा दशरथ को पुत्र नहीं हो रहा था। उन्होंने पुत्रप प्राप्ति के लिए यज्ञ करने का फैसला लिया।महाराजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ किया। महाराज दशरथ ने श्यामकर्ण घोड़े को चतुरंगिनी सेना के साथ छुड़वाने का आदेश दिया। महाराज ने समस्त मनस्वी, तपस्वी, विद्वान ऋषि-मुनियों तथा वेदविज्ञ प्रकाण्ड पण्डितों को बुलावा भेजा। वो चाहते थे कि सभी यज्ञ में शामिल हों। यज्ञ का समय आने पर महाराज दशरख सभी अभ्यागतों और अपने गुरु वशिष्ठ जी समेतअपने परम मित्र अंग देश के अधिपति लोभपाद के जामाता ऋंग ऋषि के साथ यज्ञ मण्डप में पधारे। फिर विधिवत यज्ञ शुभारंभ किया गया। यज्ञ की समाप्ति के बाद समस्त पण्डितों, ब्राह्मणों, ऋषियों आदि को यथोचित धन-धान्य, गौ आदि भेंट दी गई हैं और उन्हें सादर विदा किया गया।यज्ञ के प्रसाद में बनी खीर को राजा दशरथ ने अपनी तीनों रानियों को दी। प्रसाद ग्रहण करने के परिणामस्वरूप तीनों रानियों गर्भवती हो गईं। सबसे पहले महाराज दशरश की बड़ी रानी कौशल्या ने एक शिशु को जन्म दिया जो बेहद ही कान्तिवान, नील वर्ण और तेजोमय था। इस शिशु का जन्म चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। इस समय पुनर्वसु नक्षत्र में सूर्य, मंगल शनि, वृहस्पति तथा शुक्र अपने-अपने उच्च स्थानों में विराजित थे। साथ ही कर्क लग्न का उदय हुआ था। फिर शुभ नक्षत्रों में कैकेयी और सुमित्रा ने भी अपने-अपने पुत्रों को जन्म दिया। कैकेयी का एक और सुमित्रा के दोनों पुत्र बेहद तेजस्वी थे।
कथा सुनने के लिए बड़े ही संख्या में लोग पधारे हैं कथा संयोजक आचार्य श्री पवन पांडे जी ने कहा कि रुद्रपुर में शायद पहली बार श्री रामचंद्र की कथा हो रही है सभी लोग आए और इस कथा मैं शामिल हो.

