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राजनीतिक अवकाश से लौटे हरदा, बोले मेरे ऊपर थोपी जा रही पिछली हार। बोले जनता देगी जबाब,व्यापक भ्रमण करने का ऐलान 

नरेन्द्र राठौर(खबर धमाका)। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से राजनीतिक अवकाश पर जाकर सियासी गलियारों पर बहस छेड़ चुके पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बड़ा बयान जारी किया गया, उन्होंने अपनी ही पार्टी पर पिछले चुनावों की हार का ठीकरा उनके सिर फोड़ने का आरोप मढ़ते हुए व्यापक भ्रमण का ऐलान कर दिया है।

शोसल मीडिया पर जारी वयान में हरदा ने लिखा है कि मेरा अर्जित अवकाश एक बहुत अति सामान्य, छोटा सा व्यक्तिगत निर्णय था। मैंने अपने उद्वेलित मन की शांति के लिए यह निर्णय लिया था। कुछ बयान आए, कुछ टिप्पणियां हुईं, कुछ चर्चाएं भी हुईं, मुझ पर सवाल भी दागे गए। उसके आलोक में एक बड़ा प्रश्न उभर कर आया कि 2017 में, जो चुनाव मेरे मुख्यमंत्री रहते हुआ था, वह चुनाव हम क्यों हारे? 2022 के विधानसभा चुनाव में मैं कैंपेन कमेटी का चेयरमैन था, हम चुनाव क्यों हारे? सामान्यतः यह चुनाव सामूहिक नेतृत्व में लड़ा गया चुनाव था, मगर प्रश्न आज केवल मुझसे ही पूछा जा रहा है! प्रश्न ये भी पूछे जा रहे हैं कि मैं क्यों हारा? यह सब प्रश्न इस अदृश्य सुझाव के साथ पूछे जा रहे हैं कि क्यों नहीं अब मैं राजनीति से अलग हो जाऊं?
एक महति प्रश्न मेरे मन में भी उठ रहा है, जिसका समाधान उत्तराखंड के भाई-बहन ही कर सकते हैं। मैंने बहुत सोच-समझकर, व्यापक अध्ययन आधारित परामर्श के बाद भारतीय जनता पार्टी के हिंदुत्व आधारित राष्ट्रवाद, जिसकी शक्ति लोगों को बांटने में थी, उसके मुकाबले के लिए स्थानीयता अर्थात स्थानीय संस्कृति, भाषा-बोली, पहनावे, व्यंजन, हस्त-शिल्प और परिवेशी उत्पादन आधारित समन्वयवादी राष्ट्रवाद की बात की, जिसको हम बहुधा उत्तराखंडियत कहते हैं। हम लगातार एक के बाद एक चुनाव क्यों हारे? मैं इस सोच का अग्रगणीय संदेश वाहक था, मैं क्यों लगातार हारा? लोगों को हमारा नैरेटिव क्यों पसंद नहीं आया?
राज्य उत्तराखंड और उत्तराखंडियत का ध्वजवाहक हार जाए, तो यह एक बड़ा प्रश्न है, जिसका उत्तर जनता-जनार्दन से ही आ सकता है। मैं इस उत्तर की खोज में व्यापक भ्रमण करूंगा, जो छोटे-छोटे टुकड़ों में होगा। मैं इसे 15 अप्रैल, 2026 को जनपद उत्तरकाशी के गंगोत्री राजमार्ग और धराली की वस्तु-स्थिति के अध्ययन के साथ प्रारंभ करना चाहता हूं।
20 अप्रैल 2026 के बाद मैं थराली और कनलगढ़ घाटी के आपदा पीड़ितों के मध्य भी जाऊंगा। उनसे यह जानने का प्रयास करूंगा कि हमने वर्ष 2014-15 में आपदा के दौरान पुनर्निर्माण और पुनर्वास के जो काम किए थे, आप उसकी तुलना में आज अपने आप को कहां पर पाते हैं?
इसी दौरान मैं अपने गांव मोहनरी में ग्वेल देवता और ईष्ट देवता की शरण में भी जाऊंगा और 27 अप्रैल को अपने गांव में रहूंगा। इसके बाद मैं अपने कर्मक्षेत्र हरिद्वार का भी भ्रमण करूंगा।