उत्तराखंड

ठुकराल का मन,कांग्रेस या भाजपा!कांग्रेस तैयार,भाजपा का भी नहीं इंकार।तराई के बड़े हिंदू वादी में नेताओं में होती है गिनती।रुद्रपुर के 30 प्रतिशत लोग आज भी ठुकराल को ही समझते हैं क्षेत्र का विधायक 

नरेन्द्र राठौर

रुद्रपुर (खबर धमाका)। ऊधमसिंहनगर ही नहीं उत्तराखंड के सबसे बड़े हिंदूवादी नेताओं में गिने जाने वाले रुद्रपुर के पूर्व विधायक ठुकराल लोकसभा चुनाव से किसके हाथ धमेगें,यह ठुकराल के अलावा कोई नहीं जानता, लेकिन उनकी जरूरत सभी को है। कांग्रेस उन्हें माला पहनाने के लिए लंबे समय अतुर बैठी है,तो भाजपा में वापसी की उनकी उम्मीद पूरी तरह कायम है। क्योंकि दोनों पार्टियां उनके कद और फायदे का जानती है।

अपनी कड़क आवाज और बेकाब कार्यशैली के लिए महसूर रुद्रपुर के पूर्व राजकुमार ठुकराल किसी पहचान के महऔतआज नहीं है। दो वार पूर्व मंत्री बेहड को हराकर विधायक बनने के बाद पिछले विधानसभा चुनाव में ठुकराल ने निर्दलीय चुनाव लडकर 28 के वोट लेकर सभी चौंका दिया था, जिससे यह भी साबित हो गया था कि जनता में उनकी कितनी पकड़ है। बताते तो यह भी कि आज भी 30 प्रतिशत लोगों को यही पता है,कि उनका विधायक राजकुमार ठुकराल है। इसमें वर्तमान विधायक शिव अरोरा का जनता से पूरी तरह न जुड पाना भी मुख्य बजह है, जबकि राजकुमार हारने के बाद भी आज भी जनता से सीधे जुड़े हुए हैं।

इधर लोकसभा चुनाव से पहले ठुकराल किसका साथ देंगे इसकी बहस शुरू हो गई है। पिछले दो से साल उनके कांग्रेस में जाने की की बार खबरें भी आई है, उसका कांग्रेसी नेताओं से बड़ी नजदीकियों के बाद मीडिया पर इसको लेकर बहस भी चली है, लेकिन ने ठुकराल क्या करने वाले हैं,इसको लेकर कभी खुलकर नहीं बताया है। इधर बुधवार को शहर में आए सीएम धामी के रोड शो का अभिनंदन कर ठुकराल ने फिर साबित कर दिया है,कि उनका दिल अभी भाजपा से जुडा है। और भाजपा में वापसी की उनकी उम्मीद अभी कायम है।

राजनीति पंडितों की मानें तो ठुकराल की उम्मीद के पीछे कई कारण भी है। एक तो उन्होंने भाजपा और नेताओं के खिलाफ कभी खुले मंच से कोई टिप्पणी नहीं की है, दूसरी उनकी हिंदूवादी छबी है।जो सिर्फ भाजपा में ही फिट बैठती है। और यदि वह कांग्रेस में गए तो उन्हें कांग्रेस की परम्परा में ढालना होगा,जो इतना आसान नहीं होगा। शायद इसलिए ठुकराल दो वर्ष समय बीतने के बाद भी अपना घर तलाश नहीं कर पाए हैं।

इधर सूत्रों की मानें तो ठुकराल की घर वापसी की खबर जल्द समाने आ सकती। लोकसभा चुनाव में भाजपा अपनी जीत तय करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ने वाली है, ऐसे यदि ठुकराल की वापसी नहीं हुई तो पार्टी को इसका नुकसान होगा,यह भाजपा भली भांति जानती है।