किसान नेता यशवंत मिश्रा की पुण्यतिथि कल। छात्र राजनीति से शुरू हुआ संघर्ष,किसानों के लिए लडी लंबी लड़ाई,भाजपा को मजबूत करने में भी निभाई थी अहम भूमिका।
रुद्रपुर(खबर धमाका) लालपुर क्षेत्र के ग्राम प्रतापपुर में जन्में किसान/भाजपा नेता यशवंत मिश्रा की 14 जून यानी कल पुण्य तिथि है। उनकी पुण्यतिथि परिजनों द्वारा पूरी श्रद्धा के साथ मनाने की तैयारी चल रही है।
स्व.यशवंत मिश्रा की बात करें तो 20 जुलाई 1960 को यशवंत मिश्रा जी का जन्म हुआ। बचपन से ही उनका स्वभाव सरल, अनुशासित और समाज के प्रति संवेदनशील था। प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद, 1978 में उन्होंने डिग्री कॉलेज में प्रवेश लिया। यहीं से उनके जीवन को एक नई दिशा मिलनी शुरू हुई।
1978 से 1983 तक, कॉलेज के दिनों में उन्होंने सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि छात्र राजनीति में भी सक्रिय भागीदारी निभाई।
राजनीति और सेवा भाव की सोच की पहली सीढ़ी कॉलेज ही होता है, जहाँ जीवन की आगे की दशा और दिशा तय होती है। यही वह दौर था जब उन्होंने समाज की समस्याओं को करीब से समझा और जनसेवा को अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया।
सन् 1985 में स्वर्गीय यशवंत मिश्रा ने युवाओं को एकजुट कर समाज सेवा की मजबूत नींव रखी।
सन् 1992 में तत्कालीन मंत्री रहे पूर्वांचल का प्रमुख चेहरा कांग्रेस के कद्दावर नेता हरिशंकर तिवारी जी का लालपुर, किच्छा में आयोजित स्वागत समारोह स्वर्गीय यशवंत मिश्रा जी के जनसेवा जीवन का एक महत्वपूर्ण और यादगार पड़ाव साबित हुआ।
जनसेवा, समर्पण और लोकहित के प्रति अटूट निष्ठा ने स्वर्गीय यशवंत मिश्रा जी को जनमानस के बीच एक विश्वसनीय और सम्मानित व्यक्तित्व के रूप में स्थापित किया।
सन् 2007 से 2015 तक स्वर्गीय यशवंत मिश्रा जी ने किसानों के हितों और उनके अधिकारों के लिए निरंतर कार्य किया।
2014 – एक चुनाव, एक लहर, एक नई शुरुआत।
रुद्रपुर–ऊधम सिंह नगर लोकसभा क्षेत्र से Bhagat Singh Koshyari की ऐतिहासिक जीत ने उत्तराखंड की राजनीति में एक नया अध्याय लिखा। यह जीत केवल एक चुनावी सफलता नहीं थी, बल्कि जनता के विश्वास, मजबूत नेतृत्व और विकास के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बनी।
युवाओं के प्रेरणा स्रोत, कृषकों के शुभचिंतक एव गरीब और आम जनता की सहायता के लिए सदेव तत्पर रहने वाले यशवंत मिश्रा जी की अल्प आयु में 14.06.2016 को आक्समिक निधन हो गया !!
श्री यशवंत मिश्रा जी का जीवन जनसेवा, समर्पण और किसानों के अधिकारों के लिए निरंतर संघर्ष का प्रतीक था।
प्रतापपुर में निर्मित स्मृति द्वार उनकी अमर विरासत को श्रद्धांजलि अर्पित करता है। उनका व्यक्तित्व, नेतृत्व और समाज के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा। यह स्मारक उनके आदर्शों, संघर्षों और जनहित के प्रति उनके योगदान की याद को जीवंत बनाए रखेगा।
