बासमती और मसालों से समृद्धि की राह: किसान गोष्ठी में कृषि के नवाचारों पर मंथन।मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण और निर्यात की संभावनाओं पर विशेषज्ञों ने किसानों को किया जागरूक
काशीपुर(खबर धमाका)। कृषि विज्ञान केंद्र, काशीपुर में बासमती धान एवं मसाला फसलों के मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण विषय पर आयोजित किसान गोष्ठी एवं जागरूकता कार्यक्रम ज्ञान, नवाचार और कृषि विकास का सशक्त मंच बनकर उभरा। कार्यक्रम में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, उत्पादों के मूल्य वर्धन तथा निर्यात की संभावनाओं से अवगत कराया गया।
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केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. शिव कुमार शर्मा ने उपस्थित कृषकों का स्वागत करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने एकीकृत कृषि प्रणाली में मत्स्य पालन की उपयोगिता और उससे होने वाले आर्थिक लाभों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे काशीपुर विधायक *त्रिलोक सिंह चीमा* ने किसानों को संबोधित करते हुए कृषि के नए आयाम अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि मूल्य संवर्धन केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि सफाई, ग्रेडिंग, पिसाई और मिश्रण जैसी सरल प्रक्रियाओं के माध्यम से भी किसान अपने उत्पादों का मूल्य बढ़ा सकते हैं। उन्होंने प्रसंस्करण की प्राथमिक, द्वितीयक और उच्च स्तरीय तकनीकों को अपनाने पर बल देते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक से जुड़कर किसान अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं।
पंतनगर विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार शिक्षा *डॉ. जितेंद्र क्वात्रा* ने किसानों को बासमती धान उत्पादन की अपार संभावनाओं से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि ऊधमसिंह नगर की जलवायु और मिट्टी बासमती धान के लिए अत्यंत उपयुक्त है तथा यहां की विशिष्ट सुगंध इसे निर्यात के लिए खास बनाती है। उन्होंने किसानों से गुणवत्ता आधारित उत्पादन और मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया, ताकि स्थानीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान बना सकें।
उत्तराखंड एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केटिंग बोर्ड से आए *शैलेंद्र सिंह भदौरिया* ने मंडी सब्सिडी कार्यक्रमों और ऑर्गेनिक फार्मिंग से जुड़ी योजनाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि किसान आधुनिक मार्केटिंग रणनीतियों के माध्यम से अपने उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध करा सकते हैं। साथ ही कृषक उत्पादक संगठनों की भूमिका और बासमती धान के निर्यात की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम में *डॉ. निर्मला भट्ट* ने धान की प्रमुख बीमारियों एवं उनके प्रभावी नियंत्रण के उपायों की जानकारी दी। वहीं गन्ना अनुसंधान केंद्र के *डॉ. संजय कुमार* ने डीएसआर तकनीक को अपनाने पर बल देते हुए कहा कि बासमती धान में संतुलित उर्वरक प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है, अन्यथा उत्पाद निर्यात योग्य गुणवत्ता हासिल नहीं कर पाता।
इसके अतिरिक्त *डॉ. अनिल चंद्रा* ने मसाला फसलों की उन्नत उत्पादन तकनीकों से किसानों को अवगत कराया, जबकि *डॉ. प्रतिभा सिंह* ने मसालों के मूल्य संवर्धन एवं प्रसंस्करण की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उत्तराखंड इस क्षेत्र में तेजी से उभर सकता है।
कार्यक्रम में समृद्धि कृषक उत्पादक संगठन, गदरपुर तथा प्रगतिशील कृषक उत्पादक संगठन से जुड़े कृषकों एवं महिला किसानों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। गोष्ठी में विशेषज्ञों ने कहा कि मसाले केवल भोजन का स्वाद ही नहीं बढ़ाते, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। मूल्य संवर्धन के माध्यम से कच्चे मसालों को प्रसंस्कृत कर अधिक उपयोगी, टिकाऊ और लाभकारी उत्पादों में परिवर्तित किया जा सकता है।
इस अवसर पर *मनीष बाजपेई, सबा मसूद, रमेश कुमार पाल और जीसी जोशी* सहित कई लोगों ने कार्यक्रम के सफल संचालन में सहयोग प्रदान किया।
