आज से शुरू होगा एतिहासिक अटरिया मेला सुबह 11 बजे निकलेगा माता का डोला, महापौर विकास शर्मा करेंगे शुभारंभ माता के दर पर हर भक्त की मनोकामना होती है पूरी।हर बर्ष लाखों लोगों करते हैं माता के दर्शन
नरेन्द्र राठौर(खबर धमाका)। तराई का प्रचानी अटरिया माता मंदिर में चैत्र नवरात्रि के अष्टमी पर आज माता का डोला निकलने के साथ मेला शुरू हो जायेगा। मेले में हर की भांति इस बर्ष झूले आर्कषण का केंद्र रहेंगे।इधर इस वार मंदिर कमेटी और नगर निगम की तरफ से मंदिर को भव्य रुप दिया गया है।
अटरिया माता का डोला शनिवार आज 11 बजे रम्पुरा से शुरू होकर जगतपुरा स्थिति अटरिया माता मंदिर पहुंचेगा। जिसमें हजारों की संख्या में भक्तों के साथ महापौर विकास शर्मा समेत अन्य गणमान्य लोग शामिल होंगे। महापौर माता का डोला मंदिर पहुंचने के बाद मेला का शुभारंभ करेंगे।
अटरिया मंदिर रुद्रपुर ही नहीं तराई का एतिहासिक मंदिर है, जिसमें हर वर्ष लाखों की संख्या में भक्त अपना मत्था टेककर आर्शीवाद मांगते हैं। माता अटरिया देवी सच्चे मन से मन्नत मांगने वाले की मनोकामना पूरी करती है।
भक्तों की मानें तो दो दशक पूर्व यह जंगल हुआ करता था,इसी दौरान राज रुद्रप्रताप रथ पर बैठकर यह घूमने आए थे,इसी दौरान उनके रथ का पहिया फंस गया था,काफी कोशिश के बाद भी उनके रथ पहिया नहीं निकला,जिसपर राजा यही पर सो गया,रात को माता ने उन्हें दर्शन दिए कि राजन पास में ही एक कुंआ है,वह एक मूर्ति पड़ी है,तुम इसे निकालकर एक जगह स्थापित कर दो,तो तुम्हारे सभी कष्ट दूर हो जायेंगे। सपना पूरा होने के बाद राजा जब कुंए पर पहुंचे तो देखा कि जैसे सपने में माता कहा था ठीक वैसे ही कुंआ है और उसमें मूर्ति पड़ी हुई है,राजा ने तत्काल मूर्ति बहार निकालकर उसे जहां पर अभी अटरिया माता का मंदिर है,वहां पर स्थापित कर दिया। जिसके बाद उनके रथ का पहिया फसा हुआ था वह आराम से निकल गया। इसके बाद राजा ने मंदिर की स्थापना कराई ।बताते उस समय शेर भी रात को माता के दर्शन करने आता है।
बताया कि मंदिर में जो भी अपनी मनोकामना लेकर आता है।माता उनकी सभी कष्ट दूर करती है।यही वजह है अटरिया माता मंदिर भक्तों के अस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है। प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में दूर-दूर से लोग यह पहुंचते हैं।