रानीखेत महाविद्यालय में प्री-पीएच.डी. कोर्सवर्क का प्रथम प्रश्नपत्र संपन्न, शोधार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शोध एवं अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन के लिए किया प्रेरित
रानीखेत/उत्तराखंड (खबर धमाका)। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत में प्री-पीएच.डी. कोर्सवर्क के प्रथम प्रश्नपत्र का सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस अवसर पर आयोजित शैक्षणिक संवाद में शोधार्थियों को शोध की गुणवत्ता, मौलिकता, शोध नैतिकता, वैज्ञानिक प्रकाशन एवं आधुनिक शोध संसाधनों के महत्व से अवगत कराया गया।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. पुष्पेश पांडे ने शोधार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शोध केवल शैक्षणिक उपाधि प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि नवीन ज्ञान के सृजन और समाज की समस्याओं के समाधान का एक सशक्त आधार है। उन्होंने नियमित उपस्थिति, अनुशासन, शोध नैतिकता एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर विशेष बल देते हुए शोधार्थियों को मौलिक, गुणवत्तापूर्ण तथा समाजोपयोगी अनुसंधान के लिए प्रेरित किया।
शोध संयोजक डॉ. प्रमोद जोशी ने आगामी प्रश्नपत्र की तैयारी, पाठ्यक्रम के महत्वपूर्ण विषयों एवं परीक्षा संबंधी आवश्यक दिशा-निर्देशों की जानकारी दी। उन्होंने शोधार्थियों को गंभीरता एवं निरंतरता के साथ अध्ययन करने तथा शोध के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया।
शोध प्रकोष्ठ के सह-समन्वयक डॉ. भारत पाण्डेय ने शोध प्रकाशन एवं उसकी वैज्ञानिक उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए ‘Publish or Perish’ की अवधारणा को सरल एवं प्रभावी ढंग से समझाया। उन्होंने बताया कि शोध की सार्थकता केवल उसे पूरा करने या प्रकाशित कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रतिष्ठित एवं गुणवत्तापूर्ण शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित होकर वैज्ञानिक समुदाय तक पहुँचना और भविष्य के अनुसंधान को नई दिशा देना भी आवश्यक है। किसी शोध की वैज्ञानिक प्रभावशीलता इस बात से भी परिलक्षित होती है कि अन्य शोधकर्ता उसे कितना संदर्भित (Cite) करते हैं।
उन्होंने Citation, h-index एवं i10-index जैसे महत्वपूर्ण शोध मूल्यांकन संकेतकों की जानकारी देते हुए बताया कि ये शोधकर्ताओं के प्रकाशित कार्यों की पहुँच एवं वैज्ञानिक प्रभाव को समझने में सहायक होते हैं। साथ ही भारत सरकार की महत्वाकांक्षी ‘वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन’ (ONOS) पहल की जानकारी देते हुए बताया कि इसके माध्यम से पात्र उच्च शिक्षण एवं शोध संस्थानों के शोधार्थियों को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं तक पहुँच का अवसर प्राप्त हो रहा है। उन्होंने शोधार्थियों से इन संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर नवीन, मौलिक एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के गुणवत्तापूर्ण शोध को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में डॉ. सत्यामित्र सिंह, डॉ. पारुल भारद्वाज, डॉ. लक्ष्मी देवी चौहान एवं डॉ. आशुतोष विक्रम की गरिमामयी उपस्थिति रही।
इस अवसर पर शोधार्थियों को यह संदेश दिया गया कि सार्थक शोध की पहचान केवल शोध पत्रों की संख्या से नहीं, बल्कि उनकी मौलिकता, गुणवत्ता, वैज्ञानिक प्रभाव एवं समाज के लिए उपयोगिता से होती है।

