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उत्तर प्रदेश

मेरा रेशम–मेरा अभिमान 2.0 के तहत अजीतमल में तकनीकी प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित

औरैया/यूपी(खबर धमाका)। केंद्रीय रेशम बोर्ड के देशव्यापी अभियान “मेरा रेशम–मेरा अभिमान 2.0” के तहत बुधवार को राजकीय रेशम फार्म, अजीतमल में रेशम कृषकों के लिए तकनीकी प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अजीतमल तथा आसपास के गांवों के करीब 50 रेशम कृषकों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. बी.के. राजपूत, विभागाध्यक्ष, मृदा एवं भूमि संरक्षण विभाग, जनता पीजी कॉलेज, बकेवर रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. मनोज कुमार यादव, विभागाध्यक्ष, पादप रोग विज्ञान विभाग, जनता पीजी कॉलेज, बकेवर उपस्थित रहे। कार्यक्रम में श्री योगेंद्र सिंह, सहायक निदेशक, रेशम, औरैया ने भी भाग लेकर कृषकों का मार्गदर्शन किया।

कार्यक्रम का संयोजन श्री छत्रपाल, वैज्ञानिक-डी, क्षेत्रीय रेशम उत्पादन अनुसंधान केंद्र, गोंडा, केंद्रीय रेशम बोर्ड ने किया। उन्होंने कृषकों को रेशम उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन कराया। श्री फैयाज अहमद भट, तकनीकी सहायक, केंद्रीय रेशम बोर्ड, गोंडा ने भी तकनीकी प्रशिक्षण में सहयोग किया।

प्रशिक्षण के दौरान कृषकों को रेशमकीट पालन गृह एवं उपकरणों के वैज्ञानिक शुद्धीकरण और कीटाणुशोधन, शहतूत की वैज्ञानिक खेती एवं पौधरोपण, शहतूत फसल के रख-रखाव एवं प्रबंधन तथा शूट रियरिंग तकनीक का प्रदर्शन कराया गया। कृषकों को बताया गया कि इन वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर रेशमकीटों को स्वस्थ रखते हुए गुणवत्तापूर्ण कोया उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।

विशेषज्ञों ने बताया कि रेशम उत्पादन किसानों के लिए कृषि के साथ अपनाई जाने वाली एक महत्वपूर्ण सहायक गतिविधि और स्वरोजगार का अच्छा माध्यम है। वैज्ञानिक तरीके से रेशमकीट पालन करने पर कम अवधि में उत्पादन प्राप्त कर किसान अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं।

कार्यक्रम के दौरान भारत सरकार के “हर घर तिरंगा” अभियान के तहत भी कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें उपस्थित कृषकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

इस अवसर पर श्री राघवेंद्र सिंह, प्रभारी, राजकीय रेशम फार्म अजीतमल; श्री प्रेम नारायण, प्रभारी, राजकीय रेशम फार्म अजलपुरा, श्री दुर्गा दास, मास्टर रीलर, सहित विभागीय कर्मचारी एवं केंद्रीय रेशम बोर्ड के कार्मिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में कृषकों ने रेशम उत्पादन की उन्नत तकनीकों को समझने में विशेष रुचि दिखाई। कृषकों ने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त तकनीकी जानकारी को अपनाकर वे रेशम उत्पादन में सुधार कर अपनी कृषि आय में अतिरिक्त वृद्धि कर सकते हैं। कार्यक्रम का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।