राज्यपाल राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह पहुंचे पंतनगर यूनिवर्सिटी। मधु वाटिका, गौरा देवी प्रशिक्षण केंद्र एवं देवकीनंदन अग्रवाल ऑफ बाजपुर छात्र मनोरंजन केंद्र का फीता काटकर किया शुभारंभ
नरेन्द्र राठौर (खबर धमाका)।– महामहिम राज्यपाल सेनि0 लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह अपने एक दिवसीय जनपद भ्रमण पर पंतनगर कृषि एवं प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय पहुँचकर मधु वाटिका, गौरा देवी प्रशिक्षण केंद्र एवं देवकीनंदन अग्रवाल ऑफ बाजपुर छात्र मनोरंजन केंद्र का फीता काटकर व मंत्रोचारण के साथ पूरे विधि विधान से किया। उन्होंने स्वयं सहायता समूह कि महिलाओ से वार्ता कर उनके उत्पादों और उनकी आय के बारे में जानकारी ली। उन्होंने उनके उज्जवल भविष्य कि कामना की। उन्होंने मधु वाटिका में पौधारोपण किया। इसके उपरांत महामहिम राज्यपाल पंतनगर के पशु चिकित्सा एवं पशुविज्ञान महाविद्यालय के रतन सिंह सभागार में आयोजित विद्यार्थियों एवं वैज्ञानिकों से संवाद कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि शिरकत की।
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महामहिम राज्यपाल सेनि0 लेफ्टिनेंट जरनल गुरमीत सिंह ने सभागार में उपस्थित विद्यार्थियों व वैज्ञानिकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि हमारे लिए गर्व का विषय है कि यह विश्वविद्यालय न केवल भारत बल्कि पूरे एशिया में कृषि और तकनीकी शिक्षा का एक प्रतिष्ठित केंद्र है, जिसने भारतीय कृषि के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय आरंभ से ही कृषि शिक्षा अनुसंधान, प्रसार एवं कृषि विकास के लिए एक प्रमुख संस्थान के रूप में जाना जाता रहा है। ज्ञान और नवाचार के इस केंद्र के द्वारा आधुनिक तकनीक के प्रयोग से कृषि और ग्रामीण विकास को नई दिशा मिल रही है। उन्होंने कहा कि हमें खुशी है कि इस विश्वविद्यालय से डिग्री प्राप्त छात्र-छात्राएँ न केवल देश अपितु विदेश में भी महत्वपूर्ण पदों पर स्थापित हो कर विश्वविद्यालय एवं देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
श्री सिंह ने कहा कि प्रसन्नता का विषय है कि इस विश्वविद्यालय ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर क्यू0एस0 वर्ड रैंकिंग में उच्च स्थान प्राप्त किया है पिछले वर्ष यह स्थान 311वां था जो कि इस वर्ष उछाल लेकर 200 से 250 के मध्य है, इसके लिए मैं कुलपति सहित समस्त विश्वविद्यालय परिवार को बधाई देता हूँ। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान सहयोग हेतु देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। इससे छात्र और शोधकर्ताओं को वैश्विक स्तर पर सीखने एवं शोध करने के लिए नए-नए अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि हरित क्रांति की जन्मस्थली यह विश्वविद्यालय अब श्वेत क्रांति के अलावा सेमीकंडक्टर क्रांति का नेतृत्व करने के लिए तैयार है। मुझे बताया गया है कि विश्वविद्यालय ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय भारत सरकार की चिप टू स्टार्टअप योजना के तहत 10 करोड़ रुपए के विश्वस्तरीय इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन उपकरण हासिल किए, जिससे कुशल डिजाइनर, पेशेवर छात्र एवं संसाधन विकसित किए जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि निश्चित ही इस पहल से वैज्ञानिकों का दूरदर्शी नेतृत्व, अत्याधुनिक तकनीक के साथ प्रदेश एवं देश के विकास को नई गति देने में सक्षम होगा।
महामहिम राज्यपाल श्री सिंह ने कहा कि भगवान शिव के त्रिशूल की शक्ति की भांति तीन महत्वपूर्ण लोकार्पण – गौरा देवी प्रशिक्षण केन्द्र, मधुवाटिका एवं देवकी नन्दन अग्रवाल ऑफ बाजपुर छात्र मनोरंजन केंद्र का उद्घाटन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मैं इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए पूरे संस्थान को हार्दिक बधाई देता हूँ। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों, परीक्षाओं और कक्षाओं के बारे में नहीं है अपितु यह समग्र विकास के बारे में है। इसके लिए जरूरी है कि स्टूडेंट्स अकादमिक रूप से उत्कृष्ट होने के साथ ही पाठ्येतर गतिविधियों, खेलों और सामाजिक सहभागिता में भी शामिल हों। उन्होंने कहा कि मेरा विश्वास है कि यह केंद्र रचनात्मकता, शारीरिक फिटनेस और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ाने वाले वातावरण को प्रोत्साहित करने में सहायक सिद्ध होगा। श्री सिंह ने विद्यार्थियों से कहा कि मैं आपको इस सुविधा का सर्वोत्तम उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करता हूँ। ऐसी गतिविधियों में शामिल हों जो आपके जुनून को बढ़ावा दे, आपके कौशल को बढ़ाए और आपके समग्र विकास में योगदान दे। याद रखें, ये ऐसे क्षण हैं जो आपकी शैक्षणिक यात्रा से परे आपकी यादों और अनुभवों को आकार देंगे।
महामहिम राज्यपाल ने कहा कि ऐसी पहलों के माध्यम से ही हम अपने छात्रों को शिक्षा से परे अपनी प्रतिभा का पता लगाने के लिए सशक्त बनाते हैं, जिससे भविष्य के नेताओं, कलाकारों, एथलीटों और नवप्रवर्तकों के लिए मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने उल्लेखनीय प्रयास में शामिल सभी लोगों को बधाई देते हुए उनकी भूरि-भूरी प्रशंसा की। उन्होंने कहा उत्तराखंड की नारी शक्ति आत्मनिर्भरता और सफलता की एक नई कहानी लिख रही हैं। हमारी माताएं, बहनें और बेटियां अपने संकल्प और समर्पण से शिक्षा, कृषि, उद्यमिता, खेल, प्रशासन और अन्य विविध क्षेत्रों में एक नई पहचान बना रही है। वे समाज में अपनी निर्णायक भूमिका निभाते हुए उत्तराखंड का नाम रोशन कर रही हैं। श्री सिंह ने कहा कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में राज्य में स्वयं सहायता समूह (SHGs) एक क्रांतिकारी परिवर्तन का वाहक बन रहे हैं। हजारों महिलाओं ने इन समूहों के माध्यम से अपनी आर्थिक आत्मनिर्भरता सिद्ध की है। ये समूह न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ कर रहे हैं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन के वाहक भी बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि, हस्तशिल्प, दुग्ध उत्पादन, पर्यटन, जैविक उत्पाद और स्वरोजगार के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। यह हमारा संकल्प है कि हम महिलाओं के इस प्रगति पथ को और अधिक सशक्त करें, जिससे उत्तराखंड की नारी शक्ति प्रेरणा और सफलता की एक अद्वितीय मिसाल बने। मातृशक्ति को प्रशिक्षित करने के लिए गौरा देवी प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना महामहिम ने प्रशंसा व्यक्त की। उन्होंने कहा की मुझे आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि यहां से प्रशिक्षित माताएं एवं बहनें आत्मनिर्भर बनकर उत्तराखंड में एक नई क्रांति लाएंगी और देश- विदेश में एक मिसाल कायम करेंगी।
महामहिम राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड की जलवायु और वनस्पतियों की अनुकूलता मधुमक्खी पालन के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है। मधुमक्खियां परागण (पॉलिनेशन) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जिससे फसलों की उपज और गुणवत्ता में वृद्धि होती है। शहद उत्पादन से किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी और जैविक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का शहद, जो अपनी प्राकृतिक शुद्धता और औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त कर सकता है। सरकार द्वारा मधुमक्खी पालन को प्रोत्साहित करने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। किसानों को प्रशिक्षण, अनुदान और तकनीकी सहायता प्रदान की जा रही है ताकि वे इसे अपने व्यवसाय के रूप में अपनाकर आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें। उन्होंने जी.बी. पंत विश्वविद्यालय द्वारा उत्तराखंड में अर्धसैनिक बलों को मधुमक्खी पालन के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में प्रशिक्षण देने की पहल कि सराहना की। एनडीआरएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी और सीआईएसएफ के 149 सशस्त्र अधिकारियों ने मधुमक्खी पालन कौशल प्राप्त किया। अर्धसैनिक बल अब दूरस्थ और सीमावर्ती क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने में अपनी भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे लिए यह आवश्यक है कि हम आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग कर मधुमक्खी पालन को बढ़ावा दें। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा, बल्कि ग्रामीण रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। मेरा विश्वास है कि इस दृष्टि से मधुवाटिका की यह पहल एक मील का पत्थर साबित होगी।
महामहिम राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि आप सभी देश के भविष्य हैं, आज आपको जो ज्ञान और प्रशिक्षण यहाँ मिल रहा है, वह आने वाले समय में भारतीय कृषि को और अधिक सशक्त बनाने में सहायक होगा। आप के नवाचार, शोध और परिश्रम से भारत न केवल खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी एक अलग पहचान बनाने में सफल होगा। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि आज के दौर में तकनीकी विकास के साथ-साथ सतत कृषि और जैविक खेती की ओर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। पर्यावरण संतुलन बनाए रखना और प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। जल संरक्षण, मृदा उर्वरता बनाए रखना और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। श्री सिंह ने कहा कि उत्तराखंड में पारंपरिक फसलें जैसे मोटे अनाज और विभिन्न स्थानीय फसल प्रजातियों का आज भी कृषि उत्पादन में एक महत्वपूर्ण स्थान है। जो बेहतर स्वाद, सुगंध और अद्वितीय गुणों से परिपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि इन फसलों में कीटों और सूखे की स्थिति के प्रति प्रतिरोधक क्षमता भी अधिक है। मोटे अनाजों की उत्पादन लागत भी अन्य फसलों से अपेक्षाकृत कम है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार का लक्ष्य भी मिलेट्स के उत्पादन में देश को वैश्विक केंद्र बनाने का है। उत्तराखण्ड राज्य में यह केन्द्र अहम भूमिका निभा सकता है। चूंकि इनके उत्पादन के लिए दूसरी फसलों की तुलना में पानी और रासायनिक खादों की बहुत कम आवश्यकता पड़ती है, ऐसे में प्रदेश के किसान कम लागत पर मोटे अनाजों का उत्पादन कर अधिक लाभ कमा सकते हैं।
श्री सिंह ने कहा कि हम सभी के लिए यह चिंता का विषय है कि आज के दौर में नशा कई युवाओं के भविष्य को अंधकारमय बना रहा है।नशा न केवल व्यक्ति की उन्नति को बाधित करता है, बल्कि समाज और राष्ट्र की प्रगति में भी बाधा उत्पन्न करता है। उन्होंने कहा कि हमें दृढ़ संकल्प लेना होगा कि उत्तराखंड और देश का कोई भी युवा नशे की गिरफ्त में न आए। हम दृढ़ निश्चय कर सामूहिक प्रयासों से समाज से इस बुराई को जड़ से समाप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को साकार करने के लिए आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने हमारे किसान और युवा वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि स्मार्ट एग्रीकल्चर, ड्रोन टेक्नोलॉजी, जैविक खेती और जल संरक्षण जैसी उन्नत तकनीकों को अपनाकर कृषि क्षेत्र में क्रांति लाने के लिए भरपूर प्रयास करें। उन्होंने कहा कि हमें यह समझना होगा कि देश की सेवा केवल सीमाओं पर रक्षा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, विज्ञान, कृषि, पर्यावरण और समाज सेवा के हर क्षेत्र में योगदान देना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि देश के नागरिक जब राष्ट्र सर्वोपरि की भावना से कार्य करते हैं, तो राष्ट्र उन्नति के पथ पर आगे बढ़ता है। मेरी आप सभी से अपील है कि अपने अपने क्षेत्रों में नेशन फर्स्ट के मंत्र को आत्मसात कर कार्य करें। श्री सिंह ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि युवा किसी भी राष्ट्र की रीढ़ होते हैं। हमारी युवा शक्ति राष्ट्र सर्वोपरि की भावना के साथ पूरे सामर्थ्य से कार्य करते हुए भारत को आत्मनिर्भर, समृद्ध और विकसित बनाकर वैश्विक नेतृत्व के शिखर पर स्थापित कर सकते हैं।उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग केवल अपनी सफलता के लिए नहीं, बल्कि समाज और देश के उत्थान के लिए करें। आपका भविष्य उज्ज्वल हो और आप देश की सेवा में निरंतर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा प्रदेश में अभी 30 हजार मीट्रिक टन मधु उत्पादन होता है जिसे बढ़ाकर 60 हजार मीट्रिक टन ले जाने का प्रयास किया जाएगा।
कार्यक्रम में कुलपति डॉ मनमोहन सिंह चौहान व डॉ शाम सिंह गोयल ने भी अपने विचार रखें।
इस अवसर कुलपति डॉ मनमोहन सिंह चौहान, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा, अपर पुलिस अधीक्षक डॉ उत्तम सिंह नेगी, कुलसाचिव डॉ दीपा विनय, शोध निदेशक डॉ अजीत सिंह नयन, प्रोफेसर डॉ प्रमोद मल, छात्र कल्याणधिष्ठाता डॉ आनंद सिंह जीना सहित डीन , डॉयरेक्टर, शोधार्थी आदि उपस्थित थे।
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