*स्क्रीन पर सजी प्रयोगशाला: पहाड़ के विद्यार्थियों ने Virtual Lab से समझे भौतिकी और गणित के प्रयोग* *रसायन विज्ञान विभाग के बाद भौतिकी एवं गणित विभाग ने आगे बढ़ाई डिजिटल प्रयोगात्मक शिक्षा की मुहिम; बी.एससी. एवं एम.एससी. विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ की सहभागिता*
रानीखेत(खबर धमाका)। पहाड़ और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों तक आधुनिक प्रयोगात्मक शिक्षा की पहुंच बढ़ाने की दिशा में राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत में Virtual Lab पहल लगातार विस्तार ले रही है। इसी क्रम में महाविद्यालय के भौतिकी एवं गणित विभाग द्वारा बी.एससी. एवं एम.एससी. के विद्यार्थियों के लिए Virtual Lab कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने डिजिटल माध्यम से विभिन्न प्रयोगों एवं गतिविधियों को समझा और तकनीक आधारित शिक्षण का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।
इस पहल की खास बात यह रही कि विद्यार्थियों को केवल Virtual Lab के बारे में जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि उन्हें प्रयोगों की प्रक्रिया, उनके पीछे के सिद्धांत तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग को चरणबद्ध तरीके से समझने का अवसर भी मिला। इससे कक्षा में पढ़े जाने वाले सिद्धांतों को प्रयोगात्मक रूप में देखने और समझने का नया माध्यम विद्यार्थियों के सामने आया।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व महाविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग द्वारा भी Virtual Lab कार्यशालाओं का आयोजन कर विद्यार्थियों को डिजिटल प्रयोगात्मक शिक्षा से जोड़ा जा चुका है। रसायन विज्ञान विभाग में Departmental Coordinator, Virtual Lab डॉ. निधि शर्मा के समन्वय में आयोजित इन गतिविधियों के बाद अब भौतिकी एवं गणित विभाग ने इस क्रम को आगे बढ़ाया है, जिससे महाविद्यालय में Virtual Lab गतिविधियों का दायरा विभिन्न विज्ञान विषयों तक विस्तारित हो रहा है।
भौतिकी विभाग की Departmental Coordinator, Virtual Lab डॉ. स्तुति जोशी ने विद्यार्थियों को Virtual Lab की कार्यप्रणाली से परिचित कराया तथा विभिन्न प्रयोगों का प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि भौतिकी में सिद्धांत और प्रयोग एक-दूसरे के पूरक हैं। Virtual Lab के माध्यम से विद्यार्थी किसी प्रयोग की प्रक्रिया को समझने के साथ उसे आवश्यकता के अनुसार बार-बार देख और दोहरा सकते हैं, जिससे उनकी अवधारणात्मक समझ और अधिक मजबूत हो सकती है।
भौतिकी विभाग की डॉ. किरन पंत ने विभिन्न प्रयोगों का प्रदर्शन करते हुए उनसे जुड़े वैज्ञानिक सिद्धांतों एवं प्रक्रियाओं को सरल और व्यावहारिक तरीके से समझाया। उन्होंने विद्यार्थियों को वास्तविक प्रयोगशाला में किए जाने वाले प्रयोगों के साथ Virtual Lab का भी उपयोग करने के लिए प्रेरित किया, ताकि वे प्रयोग के प्रत्येक चरण को बेहतर ढंग से समझ सकें।
गणित विभाग की Departmental Coordinator, Virtual Lab डॉ. मीना परगई ने विद्यार्थियों को गणित में Virtual Lab की उपयोगिता एवं उपलब्ध डिजिटल गतिविधियों से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि गणित की कई अवधारणाओं को केवल सूत्रों के माध्यम से समझने की अपेक्षा visualization और interactive activities के माध्यम से देखने पर विषय अधिक सहज और रुचिकर बन सकता है। Virtual Lab विद्यार्थियों को गणितीय अवधारणाओं को नए दृष्टिकोण से समझने और स्वयं अभ्यास करने का अवसर प्रदान करती है।
डॉ. शंकर कुमार ने विद्यार्थियों को Virtual Lab पर उपलब्ध गणितीय प्रयोगों एवं गतिविधियों को समझने में सहयोग प्रदान किया। उन्होंने विभिन्न चरणों को सरल तरीके से समझाते हुए विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया और उन्हें स्वयं डिजिटल प्रयोगों एवं गतिविधियों को करने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम के तकनीकी संचालन में शोधार्थी दीक्षा ने Technical Assistance प्रदान कर Virtual Lab गतिविधियों के सुचारु संचालन में सहयोग दिया।
महाविद्यालय के Virtual Lab Nodal Officer डॉ. भारत पांडे ने कहा कि Virtual Lab की उपयोगिता पर्वतीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के संदर्भ में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “Virtual Lab प्रयोगशाला को केवल चार दीवारों तक सीमित नहीं रहने देती, बल्कि उसे विद्यार्थी के स्मार्टफोन, लैपटॉप और कंप्यूटर तक पहुंचाती है। इसका उद्देश्य वास्तविक प्रयोगशाला का विकल्प बनना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को प्रयोगों को समझने, अभ्यास करने और आवश्यकता के अनुसार दोहराने का अतिरिक्त अवसर उपलब्ध कराना है।”
उन्होंने कहा कि भौगोलिक दूरी अथवा सीमित संसाधन गुणवत्तापूर्ण प्रयोगात्मक शिक्षा तक पहुंच में बाधा नहीं बनने चाहिए। डिजिटल तकनीक का सही उपयोग विद्यार्थियों को कक्षा और प्रयोगशाला से आगे बढ़कर स्व-अध्ययन, अन्वेषण और तकनीक आधारित शिक्षा से जोड़ सकता है।
कार्यशाला के दौरान डॉ. आशा उप्रेती भी उपस्थित रहीं और उन्होंने विद्यार्थियों को इस प्रकार के तकनीक आधारित शैक्षणिक अवसरों का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के सुचारु संचालन में श्री अमित बिष्ट ने भी तकनीकी सहयोग प्रदान किया।
कार्यशाला में बी.एससी. एवं एम.एससी. के विद्यार्थियों ने अत्यंत उत्साह, जिज्ञासा और सक्रियता के साथ प्रतिभाग किया। विद्यार्थियों ने Virtual Lab पर प्रयोगों एवं गतिविधियों को स्वयं समझा, शिक्षकों के साथ संवाद किया और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। विद्यार्थियों का उत्साह इस बात को रेखांकित करता है कि डिजिटल एवं interactive learning के माध्यम से विज्ञान और गणित जैसे विषयों को अधिक जीवंत, सहज और रोचक बनाया जा सकता है।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. पुष्पेश पांडे ने पहल की सराहना करते हुए कहा, “तकनीक का वास्तविक शैक्षणिक महत्व तभी है, जब उसका लाभ दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों तक पहुंचे। Virtual Lab जैसी पहल विद्यार्थियों को आधुनिक प्रयोगात्मक शिक्षा से जोड़ने के साथ उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक सोच, जिज्ञासा और नवाचार की भावना विकसित करने का अवसर प्रदान करती है।”
प्राचार्य ने विशेष रूप से इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि रसायन विज्ञान विभाग द्वारा प्रारंभ की गई Virtual Lab गतिविधियों को अब भौतिकी एवं गणित विभाग ने भी आगे बढ़ाया है। उन्होंने Virtual Lab Nodal Officer डॉ. भारत पांडे, Departmental Coordinator, Virtual Lab (Chemistry) डॉ. निधि शर्मा, Departmental Coordinator, Virtual Lab (Physics) डॉ. स्तुति जोशी, Departmental Coordinator, Virtual Lab (Mathematics) डॉ. मीना परगई, डॉ. किरन पंत, डॉ. शंकर कुमार, डॉ. आशा उप्रेती, श्री अमित बिष्ट तथा शोधार्थी दीक्षा सहित आयोजन एवं Virtual Lab गतिविधियों से जुड़े सभी सदस्यों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी।
उन्होंने कहा कि महाविद्यालय का प्रयास होना चाहिए कि इस प्रकार की तकनीक आधारित शैक्षणिक गतिविधियां निरंतर आगे बढ़ें और पर्वतीय एवं ग्रामीण क्षेत्र के अधिक से अधिक विद्यार्थी आधुनिक डिजिटल शिक्षण एवं प्रयोगात्मक संसाधनों से जुड़कर लाभान्वित हों।

