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उधमसिंह नगर

राम की पुकार पर बजरंगी ने भरी उड़ान, संजीवनी लाकर बचाए लक्ष्मण के प्राण”।ऐतिहासिक गांधी पार्क में होगा आज रावण दहन, दशहरे की धूम।”

रुद्रपुर(खबर धमाका)।– मुख्य रामलीला में विगत रात्रि रावण द्वारा मेघनाद को युद्धभूमि भेजना, लक्ष्मण मेघनाद युद्ध, लक्ष्मण को शक्ति लगना, राम विलाप, हनुमान जी द्वारा संजीवनी बूटी लाना, मेघनाद का यज्ञ विध्वंस, मेघनाद रावण अंतिम मिलन, मेघनाद-सुलोचना संवाद, मेघनाद-लक्ष्मण युद्ध, मेघनाद वध तक की सुंदर व भव्य लीला का आयोजन हुआ। विगत रात्रि की रामलीला का उ‌द्घाटन मुख्य अतिथि महापौर विकास शर्मा ने दीप प्रज्जवलित कर किया। श्री रामलीला कमेटी ने मुख्य अतिथि महापौर को स्मृति चिन्ह भेंट कर एवं शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया तथा सभी अतिथिगणो को माल्यार्पण कर व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।

विगत रात्रि लीला की शुरुआत रावण द्वारा मेघनाद को युद्धभूमि में भेजने से हुई। पिता की आज्ञा पाकर रणभूमि पहुँचे मेघनाद और लक्ष्मण के बीच तीखे संवाद तथा भीषण युद्ध हुआ। युद्ध के दौरान मेघनाद के शक्तिबाण से लक्ष्मण मूर्छित होकर धरती पर गिर पड़े। इस प्रसंग के साथ ही रामदल में व्याकुलता छा गई।अनुज लक्ष्मण को अचेत देखकर प्रभु श्रीराम का हृदय द्रवित हो उठा। भाई को पुकारते और उनके होश में आने की प्रतीक्षा करते श्रीराम के विलाप में अगाध स्नेह तथा बिछोह की आशंका का मार्मिक चित्रण हुआ। सदैव साथ चलने वाले अनुज की ऐसी दशा देखकर उनकी विवशता ने माहौल को अत्यंत भावुक बना दिया।

इसके बाद सुशेन वैद्य द्वारा लक्ष्मण के प्राण बछड़े के लिए संजीवनी बूटी की आवश्यकता बताई तो एक राम ने बजरंगी रामभक्त हनुमान को कमान थमाई. हनुमान जी संजीवनी बूटी लाने के लिए निकल पड़े। प्रभुकार्य को सर्वोपरि मानकर संकटों का सामना करते पवनपुत्र का साहस और दृढ़ संकल्प इस लीला का प्रमुख आकर्षण रहा। औषधि की पहचान न होने पर पर्वत ही उठा लाने के प्रसंग ने भक्ति और सेवाभाव की अद्भुत शक्ति दिखाई। संजीवनी के प्रभाव से लक्ष्मण की मूर्छा दूर हुई तो रामदल की व्याकुलता प्रसन्नता में बदल गई। श्रीराम और लक्ष्मण के मिलन ने भ्रातृप्रेम के भाव को साकार किया।

अगले प्रसंग में मेघनाद के यज्ञ का विध्वंस दिखाया गया। इसके बाद युद्धभूमि में प्रस्थान से पहले मेघनाद और रावण के अंतिम मिलन का भावपूर्ण मंचन हुआ। पुत्र को रणभूमि भेजते समय रावण के भीतर उमड़ता पितृप्रेम और मेघनाद का दृढ़ संकल्प संवादों में उभरकर सामने आया। पिता-पुत्र के इस मिलन में युद्ध की गंभीरता और आने वाले वियोग की आशंका ने वातावरण को भावुक बना दिया। वहीं, मेघनाद-सुलोचना संवाद में पति की कुशलता के लिए चिंतित पत्नी की व्याकुलता और अटूट प्रेम का मार्मिक चित्रण हुआ। एक ओर सुलोचना के मन में अनिष्ट की आशंका थी, तो दूसरी ओर मेघनाद अपने योद्धा धर्म का पालन करने के लिए संकल्पित दिखाई दिया।

अंत में मेघनाद और लक्ष्मण पुनः युद्धभूमि में आमने-सामने आए। दोनों के बीच हुए भीषण संग्राम के बाद लक्ष्मण ने मेघनाद का वध किया। इसी के साथ रात्रि की लीला संपन्न हुई।

संपूर्ण मंचन ने भ्रातृप्रेम, कर्तव्यनिष्ठा, साहस और निस्वार्थ सेवा के आदर्शों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

आज राम की भूमिका में मनोज अरोरा, लक्ष्मण राजकुमार कक्कड़, हनुमान जी की भूमिका में रावण की भूमिका में विशाल भुड्डी, मेघनाद की भूमिका मे रमन अरोरा, विभीषण की भूमिका में सचिन आनन्द, गणेश भगवान की भूमिका में आशीष ग्रोवर, सुषेण वैद्य- मनोज मुंजाल, सुग्रीव- मोहन अरोरा, अंगद आयुष्मान सुशील गाबा , मंदोदरी सुमित आनंद, सुलोचना दीपक गुप्ता, नें शानदार अभिनय कर उपस्थित हजारो जनता का मन मोह लिया। संचालन मंच सचिव विजय जग्गा एवं संदीप धीर नें किया।

इस दौरान श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष मनोज गाबा, महामंत्री सुशील गाबा, कोषाध्यक्ष सीए अमित गंभीर, समन्यवयक राजेश छाबड़ा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेश शर्मा, पार्षद विष्णु, पार्षद वीनू कुमार, मंडल अध्यक्ष सुनील ठुकराल, राजन राठौर, अजय चड्ढा, उपाध्यक्ष देवी शंकर अग्रवाल, विजय अरोरा, हरीश अरोरा, महावीर आजाद, सचिव अमित अरोरा बोबी, विजय विरमानी, डायरेक्टर सुभाष खंडेलवाल, संदीप धीर, मंच सचिव विजय जग्गा, ओम प्रकाश अरोरा, राकेश सुखीजा, अशोक गुम्बर, केवल कृष्ण बत्रा, अमित चावला, आशीष मिड्ढा, जगदीश टंडन, रघुवीर अरोरा, राज घई, चन्द्र सचदेवा, बिट्टू ग्रोवर, रवि बठला, श्री रागनाटक क्लब के अध्यक्ष विशाल भुड्डी, महामंत्री गौरव तनेजा, कोषाध्यक्ष सचिन मुंजाल , संरक्षक मोहन लाल भुड्डी, सरपरस्त हरीश सुखीजा, प्रेम खुराना, राम कृष्ण कन्नौजिया, संजीव आनन्द, गुरशरण बब्बर शरणी, निर्देशक (डायरेक्टर) आशीष ग्रोवर आशू, गौरव राज बेहड़, मनोज मुंजाल, अनिल तनेजा, राजकुमार कक्कड़, रमन अरोरा, मनोज अरोरा, सुभाष तनेजा, पंकज सुखीजा, सचिन आनन्द, नरेश छाबड़ा, सौरभ राज बेहड़, गौरव जग्गा, सुमित आनंद, सचिन आनंद, मोहन अरोरा, वैभव भुड्डी, संजीव कामरा, सुशान्त चौहान, महेश गर्ग, विकास चोपड़ा, मनदीप अरोरा, राजकुमार नारंग, राजू साउंड वाले, रोहित खुराना, हर्ष अरोड़ा, अभय भुड्डी, अमन गुंबर, राज ग्रोवर, गर्वित मुंजाल, नीतीश धीर, गोगी नरूला, इदरीस गोला, अक्ष अग्रवाल, दीपक गुप्ता, शिव अग्रवाल, आयुष्मान सुशील गाबा, आशमन अरोरा, पुरु राज बेहड़ कनव गंभीर, अविश तनेजा सन्नी, आदि उपस्थित थे।

 

*बाक्स 001—मनोज अरोरा के सजीव अभिनय में साकार हुई श्रीराम की करुणा*

रुद्रपुर। नगर की प्रमुख श्रीरामलीला में प्रभु श्रीराम की भूमिका निभा रहे अनुभवी कलाकार मनोज अरोरा श्रीराम की मर्यादा, सौम्यता और करुणा को मंच पर जीवंत कर दर्शकों को श्री रामलीला से गहराई से जोड़ते है।

वर्ष 1992 में वानर सेना से अभिनय यात्रा शुरू करने वाले मनोज अरोरा ने सुलोचना, तारा, माया, वेदवती, सीता, श्रवण कुमार, भरत और नारद सहित अनेक भूमिकाओं में अपनी प्रतिभा दिखाई। वर्षों का यही अनुभव उनके श्रीराम के किरदार को परिपक्वता प्रदान करता है।

लक्ष्मण मूर्छा प्रसंग में भाई के वियोग की आशंका से व्याकुल श्रीराम की मनोदशा को उन्होंने अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया। ‘मेरे भाई लक्ष्मण मुझे न रुलाओ’ और ‘आ जाओ मेरे बजरंगबली’ जैसे गीतों की भावपूर्ण प्रस्तुति ने वातावरण करुणामय कर दिया। उनके स्वर, चेहरे के भाव और संवादों में झलकती पीड़ा ने दर्शकों को भावविभोर किया।

*बॉक्स 001. महापौर विकास शर्मा ने की 31 लाख से विकास कार्यों की घोषणा*

मुख्य अतिथि मेयर विकास शर्मा ने अपने सम्बोधन मे कहा कि रुद्रपुर की प्राचीन मुख्य रामलीला हमारी आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता की अमूल्य धरोहर है। प्रभु श्रीराम का जीवन हमें मर्यादा, सेवा और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देता है।

महापौर विकास शर्मा ने 31 लाख रुपये के विकास कार्यों की घोषणा करते हुए कहा कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों से जुड़े स्थलों का विकास हमारी प्राथमिकता है। रामलीला की परंपरा को जीवंत रखने वाले कमेटी पदाधिकारी, कलाकार और सेवादार बधाई के पात्र हैं। हम सब मिलकर रुद्रपुर को सुंदर, स्वच्छ और विकसित बनाएँ तथा प्रभु श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएँ।

बॉक्स 002- रुद्रपुर। नगर की प्राचीन मुख्य रामलीला में मेघनाद की अंतिम विदाई का दृश्य दर्शकों को भावुक कर गया। युद्धभूमि जाने से पूर्व पिता रावण, माता मंदोदरी और पत्नी सुलोचना से विदा लेते मेघनाद की मार्मिक संवाद अदायगी ने सबकी आँखें नम कर दीं। पुत्र के प्रति माता-पिता का स्नेह और पति के वियोग की आशंका से व्याकुल सुलोचना की वेदना ने वातावरण करुणामय बना दिया। कलाकारों विशाल भुड्डी, रमन अरोरा, सुमित आनंद, दीपक गुप्ता के जीवंत अभिनय ने पारिवारिक प्रेम और बिछोह की पीड़ा को मंच पर साकार कर दिया।