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उत्तराखंड

नगर की प्राचीन, बस स्टैंड वाली मुख्य रामलीला का हुआ शुभारंभ, नारद मोह की लीला का हुआ भव्य मंचन

रुद्रपुर(खबर धमाका)। रूद्रपुर नगर की प्राचीनतम धार्मिक व सामाजिक परंपराओ की प्रतीक बस अड्डे के सामनें वाली प्रभु श्री रामलीला मंचन का उद्घाटन बड़ी धूमधाम से मुख्य अतिथि मंदिर मनकामेष्वर कल्याण आश्रम, कल्याणी व्यू जी के महंत स्वामी श्रीनारायण चैतन्य महाराज जी नें फीता काटकर एवं प्रभु श्रीरामचन्द्र जी की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्जवलन कर एवं पुश्प अर्पित कर विधिवत षुभारंभ किया । षुभारंभ के पष्चात रामभजन गाये गये तथा मुख्य अतिथि महंत स्वामी श्रीनारायण चैतन्य ब्रहम्चारी महाराज नें उपस्थित श्रद्धालुओं, कमेटी पदाधिकारियों एंव सदस्यों सहित कलाकारों को संबोधित करते हुये कहा राम नाम की महिमा का वर्णन किया। उन्होनें कहा कि राम नाम बिना भाव के भी जपने से बड़े बड़े पापी तर गये। उन्होनें अनेको उदहारण देकर प्रभु नाम की महिमा का वर्णन किया।

श्री रामलीला कमेटी, श्री रामनाटक क्लब एवं श्री सनातन धर्म युवा मंच के पदाधिकारियों एवं सदस्यों नें मुख्य अतिथि सहित सभी अतिथिगणों को फूलमाला, रामनाम का पटका तथा षाल ओढ़ाकर भेंटकर स्वागत किया।

स्वागत संबोधन में श्री रामलीला कमेटी के अध्यक्ष मनोज गाबा नें कहा कि सत्य सनातन संस्कृति की प्रतीक श्री रामलीला मंचन भारत की प्राचीन परंपरा है। आपसी प्रेम, सद्भाव, मर्यादित जीवन, परिवार संस्था की खूबसूरती, भाई-भाई के आपसी प्यार, पिता-पुत्र के बीच गहरे संबंध, राजपाट से उपर पिता की आज्ञा, विश्णुअवतार राम एवं रूद्रावतार हनुमान के आपसी मिलन से लेकर राम द्वारा लक्ष्मण को मरणासन्न रावण के पास षिक्षा हेतु भेजनें सहित सैंकड़ों प्रेरणादायक प्रसंग आज के आधुनिक युग को नवराह दिखा रहें है।

प्रथम दिवस की लीला मंचन में दिखाया गया कि देवर्षि नारद हिमालय के एक शांत स्थान पर भगवान के ध्यान में लीन होकर कठोर तपस्या कर रहे थे। उनके तप के प्रभाव से देवराज इंद्र का सिंहासन डोलने लगा। इंद्र को आशंका हुई कि कहीं नारद उनकी गद्दी प्राप्त करने के लिए तप तो नहीं कर रहे। उन्होंने कामदेव को नारद की तपस्या भंग करने किंतु नारद की एकाग्रता अडिग रही। सभी प्रयास विफल होने पर कामदेव ने उनसे क्षमा माँगी। इस विजय से नारद के मन में अहंकार उत्पन्न हो गया कि उन्होंने काम पर विजय प्राप्त कर ली है।

मोहवष आत्ममुग्ध नारद अपनी विजय का वर्णन करने ब्रह्मा जी, भगवान शंकर और श्रीहरि के पास पहुँचे। भगवान शंकर ने उन्हें यह प्रसंग श्रीहरि को न सुनाने की सलाह दी, किंतु नारद ने उनकी सीख अनसुनी कर दी। श्रीहरि ने अपने भक्त का अहंकार दूर करने के लिए लीला रची।

लौटते समय नारद को एक सुंदर नगर दिखाई दिया, जहाँ राजकुमारी विश्वमोहिनी का स्वयंवर होने वाला था। राजकुमारी को देखकर नारद मोहित हो गए और उससे विवाह की इच्छा करने लगे। उन्होंने श्रीहरि से उनका सुंदर रूप माँगा। भगवान ने नारद के हित में उन्हें वानर जैसा मुख दे दिया, जिसका नारद को आभास नहीं हुआ। स्वयंवर में नारद राजकुमारी द्वारा चुने जाने की आशा लगाए बैठे रहे, किंतु उसने श्रीहरि को वरमाला पहना दी। अपना मुख जल में देखकर नारद क्रोधित हो उठे। उन्होंने श्रीहरि को श्राप दिया कि उन्हें भी मनुष्य जन्म लेकर पत्नी का वियोग सहना पड़ेगा और वानरों की सहायता लेनी पड़ेगी।

श्रीहरि ने श्राप स्वीकार किया और अपनी माया हटा ली। तब नारद को अपनी भूल का बोध हुआ। उनका अहंकार मिट गया और उन्होंने पश्चात्ताप करते हुए भगवान से क्षमा माँगी।

इस दौरान श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष मनोज गाबा, महामंत्री एवं संचालन सुषील गाबा, महामंत्री सुषील गाबा, कोशाध्यक्ष सीए अमित गंभीर, समन्यवयक राजेष छाबड़ा, वरिश्ठ उपाध्यक्ष नरेष षर्मा, विजय अरोरा, हरीष अरोरा, महावीर आजाद, सचिव अमित अरोरा बोबी, राकेष सुखीजा, डायरेक्टर सुभाश खंडेलवाल, संदीप धीर, मंच सचिव विजय जग्गा, विजय विरमानी, जगदीष टंडन, रघुवीर अरोरा, अजय फुटेला, विजय फुटेला, सुरेष मदान, रमेष अनेजा,

श्री रामनाटक क्लब के अध्यक्ष विषाल भुड्डी, महामंत्री गौरव तनेजा, कोशाध्यक्ष सचिन, संरक्षक मोहन लाल भुड्डी, सरपरस्त हरीष सुखीजा, प्रेम खुराना, राम कृश्ण कन्नौजिया, संजीव आनन्द, गुरषरण बब्बर षरणी, निर्देषक (डायरेक्टर) आषीश ग्रोवर आषू, गौरव राज बेहड़, मनोज मुंजाल, अनिल तनेजा, सचिव राजकुमार कक्कड़ एवं रमन अरोरा तथा मंच व्यवस्थापक मनोज अरोरा, सुभाश तनेजा, पंकज सुखीजा, सचिन आनन्द, नरेष छाबड़ा, पुलकित बांबा, सौरभ राज बेहड़, षिवम अनेजा, षिवम फुटेला, अनिल षर्मा, जुगनू, ममता दुबे, सुषीला षर्मा, प्रसादी दुबे, दीपा, ज्योति सेठ, आरोही आहूजा, सुमन सेठ, ज्योति सेठ, किरन सुखीजा, मोहित सुखीजा, गौरव जग्गा, सुमित आनंद, सचिन आनंद, मोहन अरोरा, वैभव भुड्डी, रोहित खुराना, हर्श अरोड़ा, अभय भुड्डी अमन गुंबर, राज ग्रोवर, गर्वित मुंजाल, नीतीश धीर, गोगी नरूला, इदरीस गोला, अक्ष अग्रवाल, दीपक गुप्ता, षिव अग्रवाल, अग्रिम सचदेवा, सक्षम दुआ, आयुष्मान सुशील गाबा, आषमन अरोरा, पुरु राज बेहड़ कनव गंभीर, ऐश तनेजा आदि उपस्थित थे।

आज की लीला में नारद जी का पात्र अभिनय मनोज मुंजाल, देवराज इन्द्र वैभव भुड्डी, कामदेव – हर्श अरोरा, ब्रहमा जी- सिद्धान्त ग्रोवर, षंकर जी-रवि चोपड़ा, विश्णु भगवान- मनोज अरोरा, विष्वमोहिनी एवं लक्ष्मी जी- कनव गंभीर, कालादेव- राम कृश्ण कन्नौजिया, पीला देव- रजत अरोरा, मंत्री गुरषरण बब्बर षरणी नें निभाया। संचालन श्री रामलीला कमेटी के मंच सचिव विजय जग्गा एवं मंच सचिव संदीप धीर नें संयुक्त रूप से किया।