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उधमसिंह नगर

आरोप-प्रत्यारोप के बीच किच्छा निकाय चुनाव की उलटी गिनती शुरू। अध्यक्ष पद के प्रत्याशियों के साथ ही बेहड और शुक्ला का भविष्य भी लिखेंगे मतदान जिसे मिलेगा आर्शीवाद वहीं होगा 2027 का सिकंदर।

नरेन्द्र राठौर(खबर धमाका)। किच्छा और सिरौली कला के चुनाव में करीब दस दिनों में चुनावी शोर के बाद मतदान की उलटी शुरू हो गई है। इस चुनाव को 2027 विधानसभा सभा का सैमीफाइनल भी माना जा रहा। राजनीतिक पंडितों की मानें तो जिस पार्टी को जनता इस चुनाव में आर्शीवाद देगी ,उसी पार्टी का विधायक भी विधानसभा में जायेगा ऐसा माना जा रहा, ऐसे में शुक्ला और बेस्ड दोनों के लिए यह चुनाव करो या मरो वाला है।
अब से करीब 12 घंटे बाद निकाय चुनाव के लिए मतदान शुरू हो जाएगा। प्रचार में दोनों पार्टियों ने पूरी ताकत झोंकी है तो बेहड और शुक्ला के बीच आरोप-प्रत्यारोपों के बाण भी जमकर चले हैं। दोनों पार्टियां अपने आप को मजबूत मानकर चल रही है। कांग्रेस शुरुआत में भले ही मजबूत रही है, लेकिन समय में भाजपा भी बराबरी में आकर खड़ी हो गई, खबरें तो ऐसी आ रही कि भाजपा अंतिम समय में कांग्रेस पर बढ़त बनाती नजर आ रहा है,अब मतदाताओं का आर्शीवाद किसे मिलेगा यह मतगणना के बाद पता चलेगा, लेकिन मतदाताओं के फैसले को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा बेहड और शुक्ला को लेकर हो रही है।
रुद्रपुर से लगातार हारकर 2022 में किच्छा से गए बेहड शुक्ला को पटखनी दे चुके,उस समय बेहड का स्वस्थ भी बहुत खराब था,माना जा रहा था कि किच्छा की जीत ने बेहड को नई जिंदगी और संजीवनी देने का काम किया था। बेस्ड ने चुनाव प्रचार में मतदाताओं से कहा था कि यह उनका अखीरी चुनाव है, लेकिन स्थितियां बदल गई है। 2027 में भी बेहड किच्छा से चुनाव लडेंगे यह तय माना जा रहा है, लेकिन यदि किच्छा का चुनाव हारे तो फिर 2027 में उनकी जीत मुश्किल भरी हो जायेंगी,और यदि वह चुनाव हारे तो उनकी राजनीतिक पारी का भी था इंड हो जायेगा ऐसा माना जा रहा है।
इधर किच्छा से दो बार विधायक रहे शुक्ला की बात करें तो 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत को हराकर अपने पूरे जोश में चुनाव लड़ें शुक्ला बेहड के आगे चारों खाने चित हो गए हैं, इसके पीछे किच्छा के मतदाताओं का चुनावी गणित सबसे अहम रहा तो पार्टी में बैठे विरोधी भी इसकी मुख्य बजह रहे।
चुनाव गणित 2027 का भी कमोवेशो पहले जैसा ही है। ऐसे में निकाय चुनाव में भाजपा की जीत शुक्ला की उम्मीद कायम कर सकती है। लेकिन यदि भाजपा हारी तो फिर उनकी उम्मीद टूट जायेगी,उनकी दावेदारी का पार्टी में पहले ही बड़े स्तर पर विरोध हो रहा, जीता का सेहरा उनके सिर बंधेगा तो हार के बाद पूरा ठीकरा उनके सिर फूटेगा यह भी तय है।
ऐसे में बेहड और शुक्ला दोनों के राजनीतिक भविष्य के लिए कल का अहम है, दोनों ही मतदाताओं को लुभाने के साथ ही अपने अपने प्रत्याशी की जीत के लिए हर संभव प्रयास में लगे, लेकिन उनके भविष्य का पिटारा मतगणना के बाद ही खुलेगा।