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उधमसिंह नगर

मेरा रेशम–मेरा अभिमान 2.0” के अंतर्गत राजकीय रेशम फार्म अजलापुर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

औरैया(खबर धमाका)। केंद्रीय रेशम बोर्ड के “मेरा रेशम–मेरा अभिमान 2.0” कार्यक्रम के अंतर्गत आज दिनांक 11 अगस्त 2026 को  अजलापुर, औरैया में रेशम कृषकों के लिए जागरूकता एवं तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य संयोजक श्री छत्रपाल, वैज्ञानिक–डी, क्षेत्रीय रेशम उत्पादन अनुसंधान केंद्र (RSRS), गोंडा रहे। कार्यक्रम में उनके सहयोगी श्री फैयाज अहमद भट्ट, तकनीकी सहायक, क्षेत्रीय रेशम उत्पादन अनुसंधान केंद्र, गोंडा, अजलापुर फार्म के प्रभारी श्री प्रेम नारायण, विभागीय कर्मचारी श्री मोहित सिंह, श्री पवन कुमार, श्री गौरव कुमार, श्री सचिन कुमार, श्री अविनाश कुमार तथा पोस्ट-कोकून गतिविधियों के लिए तैनात मास्टर रीलर श्री दुर्गा दास सहित अन्य कर्मचारी एवं 55 रेशम कृषक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान श्री छत्रपाल द्वारा रेशम कृषकों को वैज्ञानिक रेशमकीट पालन, शहतूत पौध उत्पादन एवं वैज्ञानिक शहतूत वृक्षारोपण, शूट रियरिंग तकनीक, रेशमकीट पालन गृह का विशुद्धीकरण तथा रेशमकीट रोगों की रोकथाम एवं प्रबंधन के संबंध में विस्तृत तकनीकी जानकारी प्रदान की गई। साथ ही रेशम उत्पादन के क्षेत्र में अपनाई जा रही नवीन तकनीकों एवं नवाचारों से भी कृषकों को अवगत कराया गया।

इस अवसर पर प्रश्नोत्तर एवं कृषक–वैज्ञानिक संवाद सत्र आयोजित किया गया, जिसमें कृषकों ने रेशमकीट पालन से संबंधित अपनी विभिन्न समस्याएं एवं जिज्ञासाएं वैज्ञानिकों के समक्ष रखीं। विशेष रूप से रेशमकीटों में होने वाले विभिन्न रोगों एवं उनसे होने वाले नुकसान के संबंध में कृषकों ने चिंता व्यक्त की। वैज्ञानिकों द्वारा रोगों की पहचान, रोकथाम, उपचार तथा स्वच्छ एवं वैज्ञानिक पालन पद्धतियों के माध्यम से रोग प्रकोप को कम करने के संबंध में मौके पर ही आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

कृषकों को शहतूत की वैज्ञानिक खेती एवं वृक्षारोपण के संबंध में भी विस्तार से जानकारी दी गई। कृषकों को खेत की मेड़ों, खेत के मध्य उपलब्ध स्थान तथा अन्य उपयुक्त क्षेत्रों में वैज्ञानिक विधि से शहतूत के पौधे लगाने की तकनीक समझाई गई। कृषकों ने इस तकनीक को अपनाने में अपनी रुचि व्यक्त करते हुए अपने खेतों पर वैज्ञानिक विधि से शहतूत का वृक्षारोपण करने पर सहमति व्यक्त की। इससे क्षेत्र में शहतूत की पत्ती की उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ रेशमकीट पालन एवं रेशम उत्पादन को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य रेशम कृषकों तक रेशम उत्पादन से संबंधित नवीनतम वैज्ञानिक एवं तकनीकी जानकारी पहुंचाना, उनकी व्यावहारिक समस्याओं का समाधान करना तथा रेशमकीट पालन को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ व्यवसाय के रूप में विकसित करने के लिए प्रेरित करना रहा। कृषकों को रेशमकीट पालन की वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने तथा इससे अतिरिक्त रोजगार एवं आय के अवसर सृजित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान मास्टर डीलर श्री दुर्गा दास द्वारा पोस्ट-कोकून गतिविधियों एवं रेशम धागाकरण के संबंध में जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि यदि जिले में गुणवत्तापूर्ण रेशम कोकून का उत्पादन पर्याप्त स्तर पर किया जाता है, तो उपलब्ध धागाकरण सुविधा का उपयोग कर रेशम धागे का उत्पादन किया जा सकता है। इससे रेशम उत्पादन के साथ-साथ धागाकरण एवं अन्य पोस्ट-कोकून गतिविधियों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी विकसित किए जा सकते हैं।

कार्यक्रम के अंत में कृषकों ने वैज्ञानिकों एवं विभागीय अधिकारियों द्वारा प्रदान की गई तकनीकी जानकारी के प्रति संतोष व्यक्त किया तथा वैज्ञानिक रेशमकीट पालन एवं शहतूत उत्पादन तकनीकों को अपने खेतों पर अपनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।