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रानीखेत महाविद्यालय की पांच छात्राओं का वैश्विक STEM एक्सेलेरेटर कार्यक्रम में चयन।दुनिया के विभिन्न देशों के विशेषज्ञ करेंगे मार्गदर्शन, विज्ञान और शोध के क्षेत्र में खुलेंगे नए अवसर।

 

रानीखेत(खबर धमाका)। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत की पांच छात्राओं ने विज्ञान, शोध और नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए ‘कल्पना: शी फॉर STEM’ (Kalpana: She for STEM) कार्यक्रम के एक्सेलेरेटर चरण (Accelerator Phase) में स्थान बनाया है। VigyanShaala द्वारा संचालित इस पहल का उद्देश्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्र में अध्ययनरत युवतियों को शोध, उच्च शिक्षा, पेशेवर मार्गदर्शन और करियर के बेहतर अवसरों से जोड़ना है।

महाविद्यालय की रितु मेहरा, ज्योति, तनिशा आर्या, हर्षिता फर्त्याल और भावना बिष्ट का इस प्रतिष्ठित मेंटरशिप कार्यक्रम के लिए चयन हुआ है। अलग-अलग विज्ञान विषयों से जुड़ी इन छात्राओं को अमेरिका, ब्रिटेन, फिनलैंड और संयुक्त अरब अमीरात सहित विभिन्न देशों में कार्यरत विशेषज्ञों एवं शोधकर्ताओं से मार्गदर्शन प्राप्त होगा।

बायोटेक्नोलॉजी एवं बायोमेडिकल साइंसेज की छात्रा रितु मेहरा को अमेरिका में Roche Diagnostics की Senior Marketing Manager यशश्री जोशी जोशी का मार्गदर्शन मिलेगा। रसायन विज्ञान की छात्राओं ज्योति और तनिशा आर्या को एडिनबर्ग, यूनाइटेड किंगडम की Community Lifelong Learning and Employability (CLLE) से जुड़ी मारिया पनौकिडू मेंटर करेंगी।

वहीं, रसायन विज्ञान की छात्रा हर्षिता फर्त्याल को फिनलैंड की University of Jyväskylä में Postdoctoral Researcher शिवानी वर्मा का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। Physics & Space Science की छात्रा भावना बिष्ट को IIT Bombay से संबद्ध स्वतंत्र शोधकर्ता एवं संयुक्त अरब अमीरात में कार्यरत अतिया बदर मेंटर करेंगी।

अंतरराष्ट्रीय स्तर के मेंटर्स से सीधे जुड़ने का यह अवसर छात्राओं को केवल अपने विषयों की बेहतर समझ ही नहीं देगा, बल्कि उन्हें शोध, नवाचार, उच्च शिक्षा और STEM से जुड़े वैश्विक करियर विकल्पों को जानने का भी अवसर प्रदान करेगा। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र के एक राजकीय महाविद्यालय की छात्राओं के लिए यह अनुभव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उन्हें अपनी शैक्षणिक रुचियों को भविष्य के शोध और करियर से जोड़ने की नई दृष्टि मिलेगी।

छात्राओं की इस उपलब्धि के पीछे निरंतर मार्गदर्शन और प्रोत्साहन की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। डॉ. भारत पांडे, समन्वयक, SHE for STEM, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय रानीखेत एवं जिला समन्वयक, UCOST, अल्मोड़ा, पांचों छात्राओं के निकट मार्गदर्शक के रूप में लगातार जुड़े रहे हैं। छात्राओं को STEM से संबंधित अवसरों की जानकारी देने, विभिन्न शैक्षणिक एवं व्यावसायिक संभावनाओं को समझने और कक्षा से आगे बढ़कर शोध एवं नवाचार की दिशा में सोचने के लिए प्रेरित करने में उनका विशेष योगदान रहा है। उनका प्रयास यह दर्शाता है कि सही समय पर मिलने वाला निरंतर मार्गदर्शन पर्वतीय क्षेत्रों की छात्राओं को भी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अवसरों से प्रभावी रूप से जोड़ सकता है।

प्रदेश स्तर पर उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST) के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत द्वारा राज्य में विज्ञान, शोध, नवाचार और STEM संस्कृति को मजबूत करने के लिए किए जा रहे प्रयासों ने भी विद्यार्थियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है। उनके मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन से प्रदेश के विद्यार्थियों में वैज्ञानिक अवसरों, शोध और नवाचार के प्रति जागरूकता लगातार बढ़ रही है।

VigyanShaala की CEO दर्शना जोशी के नेतृत्व में ‘कल्पना: शी फॉर STEM’ के माध्यम से विज्ञान की छात्राओं को संरचित मेंटरशिप, पेशेवर विकास और वैश्विक STEM नेटवर्क से जुड़ने का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है। कार्यक्रम छात्राओं को अनुभवी शोधकर्ताओं और पेशेवरों से संवाद कर अपने भविष्य के लिए व्यापक दृष्टिकोण विकसित करने का मंच प्रदान करता है।

महाविद्यालय स्तर पर प्राचार्य प्रो. पुष्पेश पांडे द्वारा विद्यार्थियों को शोध, विज्ञान एवं STEM आधारित कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए निरंतर संस्थागत सहयोग एवं प्रोत्साहन दिया जा रहा है। उनके सहयोग तथा संकाय सदस्यों और कार्यक्रम समन्वयकों के मार्गदर्शन से छात्राओं को परंपरागत कक्षा शिक्षण से आगे बढ़कर नए अवसरों का लाभ उठाने का वातावरण मिला है।

SHE for STEM की सदस्य एवं मेंटर डॉ. निधि शर्मा तथा दर्शना मैम ने भी छात्राओं को निरंतर प्रोत्साहित एवं मार्गदर्शित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

एक ही महाविद्यालय की पांच छात्राओं का ‘कल्पना: शी फॉर STEM’ के एक्सेलेरेटर चरण में चयन होना न केवल महाविद्यालय के लिए गौरव का विषय है, बल्कि यह उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों की छात्राओं में मौजूद वैज्ञानिक प्रतिभा और संभावनाओं को भी रेखांकित करता है। यह उपलब्धि बताती है कि उचित मार्गदर्शन, अवसर और प्रोत्साहन मिलने पर सीमित संसाधनों वाले क्षेत्रों की छात्राएं भी वैश्विक स्तर के शोध एवं STEM नेटवर्क से जुड़ सकती हैं।

रितु, ज्योति, तनिशा, हर्षिता और भावना की यह सफलता रानीखेत ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की अन्य छात्राओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन सकती है। उनकी यह यात्रा आने वाली छात्राओं को विज्ञान, शोध, नवाचार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ने तथा उपलब्ध अवसरों का आत्मविश्वास के साथ लाभ उठाने के लिए प्रेरित करेगी।