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उत्तराखंड

रुद्रप्रयाग के छिनका गांव में मोटे अनाज को लेकर बैठक आयोजित।सजना गुसाईं बोली मोटा अनाज होता है औषाधि।

नरेन्द्र राठौर

अल्मोड़ा (खबर धमाका)।  उत्तराखंड के अगस्तमुनी बिकास खंड छिनका ग्राम पंचायत में सजन गुसाई की अध्यक्षता में मोटे अनाजों को औषधि माना जाता है करके महिला समूह ने एक बैठक आयोजित की इस बैठक उतराखड के पर्वतीय क्षेत्रों में मोटे अनाजों के बारे में बताया ये मोटे अनाज उतराखड के किस किस किस के लिए लाभदायक होते हैं और किस प्रकार इन अनाजों का सेवन किया जाता है झंगोरा की खीर,व कड़ी व भात भी खाया जाता है,गहत की दाल सर्दियों में ज्यदा तर सेवन किया जाता है।

 

सोयाबीन व भट्ट की दाल भट्ट की चुरकाडी (कुमाऊं भाषा में भटक डुबक भी कहा जाता है )सजन गुसाई ने बताया उतराखड में आज से पचास साल पहले , झंगोरा, कोदा, कौड़ी, ज्वार बाजरा, भट्ट गहत, सोयाबीन पर्वतीय क्षेत्रों में कुमाऊं गढ़वाल के हर जगहो पर बोया जाता था। लेकिन समय के अभाव व उतराखड के पर्वतीय क्षेत्रों के जगह जगह से पलायन होने से इन मोटे अनाजों की उपज बहुत कम होते जा रही है। इसलिए सजन गुसाई ने अपने छिनका ग्राम पंचायत में महिला समूह के साथ मोटे अनाज व दालों के बारे जानकारी व फायदे के लिए एक बैठक रखी है।इस बैठक में हमारे कुमाऊं गढ़वाल में किस तरह के मोटे अनाज स्वास्थ्यवर्धक औषधि के काम आते। झंगोरा का भात खाने से पिलाया , ब्लडप्रेशर,सुगर व दिल के बिमारियों के लिए काफी फायदेमंद होता है।गहत की दाल का सेवन करने से किडनी में स्टोन (पतथरी) खांसी जुखाम, डायरिया या दस्त,पेट के कब्ज के लिए फायदेमंद सोयाबीन बीन व भट्ट सोयाबीन व काले भट्ट दाल व भट्ट की चुरकाडी के साथ-साथ यह पोषक तत्वों का खजाना है। सोयाबीन का तेल भी बनाया जाता है, इधर सोयाबीन को रात्रि को भिगाकर शुबे शुबे प्रातः काल एक एक दो मुट्ठी रोज़ खाने कई प्रकार की बीटामीन व प्रोटीन मिलती है। हडि्डयों को कमजोर होने से रोकने में सोयाबीन का सेवन करने से काफी फायदेमंद होता है।इन मोटे अनाजों में कार्बोहाइड्रेट प्रोटीन आयोडीन जिंक,वसा, बीटामीन बी, फास्फोरस, आयरन, आयोडीन आदि प्राप्यत मात्रा मिलता है।इस बैठक में सजन गुसाई, लोकगायिका सीमा गुसाई, सुलोचना देवी, गुड्डी बिष्ट, गुड्डी देवी, मीरा देवी, रेखा देवी, लक्ष्मी देवी, उषा देवी, अल्पना देवी, सरिता देवी आदि मौजूद रहे।