सामिया का दावा निकला झूठा,बैंक का करोड़ो का कर्ज अदा करने के दावे के साक्ष्य नहीं कर पाये पेश। कल होगा सामिया की कारीगरी का एक और बढ़ा खुलासा।
नरेन्द्र राठौर
रुद्रपुर। कहते हैं कि झूठ के पांव नहीं होते। उसके सच समाने आ ही जाता है। ऐसा ही औघोगिक नगरी रुद्रपुर में लोगों के सपने चकनाचूर कर रही सामिया लेक सिटी में हो रहा। बैंक और ग्राहकों का करोड़ो रुपया हड़प कर बैठे सामिया प्रबंधन ने पिछले ने पिछले सप्ताह दो दावा किया था उसकी भी हवा निकल गयी है,यानी की मीडिया रिपोर्ट सही साबित हुई है और सामिया प्रबंधन का दावा झूठा निकला है।

गौरतलब है कि 2006 में रुद्रपुर के काशीपुर रोड पर बड़े बड़े सपने दिखाकर स्थापित हुई सामिया लेक सिटी की बदहाल हालत पिछले दिनों सुर्खियां बनी थी,इसी बीच कालौनी की 44 एकड़ जमीन कुर्क होने का खुलासा हुआ था, तहसील के दस्तावेजों के मुताबिक सामिया लेक सिटी पर दिल्ली की एक बैंक का आठ करोड़ रुपया बकाया, कंपनी के खिलाफ 16 लोगों ने तेरा कोर्ट में केस भी कर रखा है, जिसमें कोर्ट ने कालौनी प्रबंधन को पैसा वापसी की आरसी काट रखी है। बैंक और लोगों का करोड़ो रुपया न लौटने पर तहसील प्रशासन ने सामिय की 44 एकड़ के करीब जमीन कुर्क कर दी है। यानी की उस जमीन पर सामिया का अधिकार खत्म हो चुका है।

इधर सामिया प्रबंधन ने मीडिया में खबरें प्रकाशित होने के बाद ध्यान जारी कर कहा था की कंपनी ने बैंक का पैसा चुका दिया है,वह इसके दस्तावेज तहसील में नहीं दे पाए, जिसके वजह से खतौनी ने कुर्क शब्द नहीं हट पाया है।

सामिया लेक सिटी के डायरेक्टर सगीर खान के इस बयान को एक सप्ताह समय बीत चुका है, लेकिन सामिया प्रबंधन बैंक पैसा आदा करने के दस्तावेज तहसील प्रशासन को उपलब्ध नहीं करा पाया है, जिससे साफ है की सामिया प्रबंधन का दावा झूठा था, तहसीलदार नीतू डागर ने भी इसकी पुष्टि की है। तहसीलदार ने बताया की सामिया प्रबंधन ने उन्हें बैंक व लोगों के पैसा जमा करने के अभी तक कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए हैं, जिससे साफ की प्रबंधन झूठ बोल रहा है
