सीना तानने वाले गयाब,उजड़ गए सैकड़ों दुकानदार। भड़काऊ भाषण और अपशब्दों का इस्तेमाल बनी मुख्य बजह। आंदोलन को हवा देने वाले कुछ लोगों ने पुलिस को घर बुलाकर किया सरेंडर। अपने 40 पाषर्दों के साथ प्रशासन को चेतावनी देने वाले मेयर भी रहे गयाब
नरेन्द्र राठौर
रुद्रपुर। महानगर में नैनीताल हाईवे पर बनी 100 से दुकानें प्रशासन ने ध्वस्त कर दी। प्रशासन की कार्यवाही पर दुकानदार सवाल उठा रहे,लोग इसके उन लोगों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।मेयर, पूर्व विधायक के बयान और व्यापारियों द्वारा निकले गए जूलूसों में प्रशासन के खिलाफ गलत बयान को इसका जिम्मेदार ठहराया जाए तो ग़लत नहीं होगा।
चलों आपको शुक्रवार को हुई प्रशासन की कार्यवाही की सिलसिलेवार कहानी समझाते हैं। नेशनल हाईवे से अतिक्रमण हटाने का सिलसिला यूं तो प्रशासन ने होली से पहले ही शुरू कर दिया था, नैनीताल हाईवे पर दुकानें हटाने की कवायद के मद्देनजर व्यापारियों इसको लेकर विधायक से मिलने के डीएम के साथ बैठक की थी, डीएम ने व्यापारियों को राहत देने का भरोसा दिया। इधर पिछले शनिवार को राजस्व विभाग की टीम ने जब गांधी पार्क से लगी दुकानों को नोटिस दिया तो दुकानें बंद करवाकर व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय धरने पर बैठ गए। इसके बाद मेयर रामपाल भी मौके पर पहुंचे। अगले दिन मेयर ने नगर निगम में बैठक कर निगम के सभी पाषर्दों के साथ व्यापारियों का साथ देने का ऐलान कर दिया । उन्होंने साफ कहा की वह किसी भी हाल ही व्यापारियों को उजडने नहीं दिया जायेगा। उन्होंने तो यह तक कह दिया की वह भाजपा के मेयर बाद में,शहर के साथ पहले है। व्यापारियों ने भी थाली बजाओ रैली में प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर भष्ट प्रशासन, हिटलरशाही जैसे शब्दों का इंतेज़ार किया। पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने तो प्रशासन के सामने शीना तानकर खड़े होने की चेतावनी दे डाली,रोडबेज बस स्टेशन में बन रहे माल को लेकर भी व्यापार मंडल अध्यक्ष ने जो कहा वह जगजाहिर है। बताया जाता की नेताओं की यह वयानबाजी वोटों से प्रभावित थी, इधर जब प्रशासन की कार्यवाही का समय आया तो कुछ सरेंडर कर गए और कुछ गायब हो गए। और दुकानदार अपने वर्षों का करोबार देखते रह गए हैं। चर्चा तो इस बात की भी है की आंदोलन को हवा देने वाले कुछ नेताओं ने पुलिस को घर बुलाकर सरेंडर किया है।
