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स्वामीनाथन रिर्पोट के आधार समर्थन मूल्य तय करें सरकार,विर्क।तराई किसान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष तजिंदर सिंह विर्क सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य पर खड़े किए सवाल

नरेन्द्र राठौर

रुद्रपुर (खबर धमाका)। केंद्रसरकार द्वारा ख़रीफ़ फ़सलों पर समर्थन मुल्य घोषित करने पर प्रतिक्रिया देते हुए तजिंदर सिंह विर्क ने कहा सरकार स्वामीनाथन रिपोर्ट के आधार पर C2 यानी कुल लागत पर 50 प्रतिशत मुनाफ़े के आधार पर समर्थन मूल्य घोषित करें जोकि धान का 2866 प्रति कुंटल बनता है और जो सरकार ने घोषित किया है वह है 2183 रू . किसान को प्रति कुन्तल धान पर 683.5 सरकार का घाटा है . A2+FL पर मुल्य घोषित कर सरकार झुठी वाह वाही लूटना चाहती है (कर्षि लागत मुल्य आयोग ) की तालिका संलग्न है‌

स्वामीनाथन रिर्पोट के आधार समर्थन मूल्य तय करें सरकार,विर्क।तराई किसान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष तजिंदर सिंह विर्क सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य पर खड़े किए सवाल

तराई किसान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष तजिंदर सिंह विर्क ने बताया कि सरकार ने किसानों की फसल का एमएसपी मूल्य अपने ढंग से बढ़ाया है जबकि वर्तमान समय में फसलों की लागत एमएसपी मूल्य से दोगुना हो गई सरकार ने अपने घोषणापत्र में कहा था यदि भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी तो हम स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करेंगे लेकिन आज तक सरकार ने उस पर कोई विचार नहीं किया विगत वर्षों में गन्ना मूल्य में किसी भी प्रकार की कोई वृद्धि नहीं की गई आंकड़े बताते हैं की एमएसपी पर खरीद सरकार मात्र कुछ प्रतिशत किसानों की ही करती है शेष किसान अपनी फसल खुले बाजार में बेचने को मजबूर रहते हैं ऐसी दशा में किसान आंदोलन के समय सरकार ने जो किसानों से समझौता किया था कि हम एमएसपी मूल्य एक गारंटी का कानून बनाएंगे किसानों की मांग है कि सरकार एमएसपी के गारंटी का कानून बनाए और जो लोग एमएसपी से कम मूल्य पर फसल खरीदते हुए पाया जाए उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाए भाजपा ने विधानसभा चुनाव के दौरान अपने घोषणापत्र में कहा था की यदि भारतीय जनता पार्टी की सरकार चुनकर आई तो हम किसानों को मुफ्त बिजली देंगे लेकिन सरकार किसानों के निजी नलकूपों पर मीटर लगाने का काम कर रही है यह किसानों के साथ धोखा है विधानसभा में एक प्रश्न के दौरान सरकार ने किसानों को मुफ्त बिजली देने से इनकार किया है इससे किसानों की माली हालत खराब हो रही है सरकार चुनाव के दौरान जनता के बीच कह गए मुद्दों की कसौटी पर खरी नहीं उतर रही है