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उधमसिंह नगर

*निकाय हारे तो खतरे में पड़ जायेंगी विधानसभा में शुक्ला की दावेदारी।* *विधानसभा लड़ने के लिए निकाए की अग्निपरीक्षा करनी ही होगी पास* *बेहड के खिलाफ पहले भी अभी चुनाव नहीं जीते हैं शुक्ला* 

नरेन्द्र राठौर(खबर धमाका)। ऊधमसिंहनगर के किच्छा और सिरौली में 22 सितम्बर को होने वाले निकाय चुनाव में अध्यक्ष पद के दावेदार से ज्यादा विधानसभा का चुनाव लडने वालों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गए हैं। माना यह जा रहा कि जिस पार्टी को निकाय चुनाव में जीत मिलेगी, विधानसभा में भी उसी पार्टी का विधायक बनेगा। ऐसे में यदि चुनाव हारी तो भाजपा अपना उम्मीदवार भी बदल सकती है, ऐसे में निकाय चुनाव शुक्ला और बेहड दोनों के लिए करो या मरो वाला हो चुका है।
2027 के विधानसभा चुनाव से कुछ माह पहले हो रहा किच्छा और सिरौली कला का निकाय चुनाव भाजपा पूर्व विधायक की अग्निपरीक्षा के रुप में हो रहा।2022 किच्छा विधानसभा में हुई हार के बाद भाजपा में लगातार बदलाव की मांग उठ रही है।कहा यह जा कि शुक्ला कभी भी बेस्ड के मुकाबले ना तो आज तक जीत दर्ज कर पाए हैं और ना ही आगे कर पायेंगे। पिछले रिकॉर्ड इसका उदाहरण भी है, ऐसे में 22 सितम्बर को होने वाले किच्छा और सिरौली का चुनाव उनके लिए अहम और जरुरी हो गया, हालांकि सिरौली कला में भाजपा ने अपना प्रत्याशी खड़ा नहीं किया है, लेकिन में अभी तक जो रिपोर्ट है वो भाजपा और खासकर के शुक्ला के मांथे पर शिकन पैदा करने वाली है।
इसके पीछे क्या कुछ कारण है इसका आने वाले समय में विश्लेषण जरुर होगा, क्योंकि धामी सरकार की हैट्रिक लगाने के लिए हर सीट पर सीधी नजर है, किच्छा निकाय चुनाव में नामांकन के दौरान जिस प्रकार की स्थिति खड़ी हुई थी,वह किसी से छिपी नहीं है,विपक्ष और खुद पार्टी के लोगों ने जिस प्रकार की शिकायते मुख्यमंत्री और संगठन के सामने रखी वह भी जगजाहिर है।
ऐसे में किच्छा का चुनाव भाजपा प्रत्याशी संदीप अरोरा से ज्यादा पूर्व विधायक शुक्ला के लिए अहम और जरुरी हो गया है। मंदिर किच्छा चुनाव भाजपा हारी तो फिर शुक्ला की दावेदारी मुश्किल में पड़ जायेंगी,ऐसी चर्चाएं चल रही है।