सरकारी जमीनें चहेतों को कौड़ियों के भाव देने की तैयारी: यशपाल आर्य।नेता प्रतिपक्ष ने सरकार की तैयारियों का किया खुलासा
देहरादून(खबर धमाका)। उत्तराखण्ड के नेता प्रतिपक्ष श्री यशपाल आर्य ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार विभिन्न सरकारी विभागों की बहुमूल्य जमीनों को अपने चहेते लोगों को कौड़ियों के भाव देने की योजना पर काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि देहरादून के विकासनगर स्थित उत्तराखण्ड जल विद्युत निगम तथा नैनीताल जनपद के रामगढ़ में उद्यान विभाग की भूमि को यूआईआईडीबी (UIIDB) के नाम किए जाने संबंधी शासनादेश जारी किया जा चुका है।
श्री आर्य ने आशंका जताई कि यूआईआईडीबी के माध्यम से इन जमीनों को औने-पौने दामों में निजी हाथों में सौंपा जा सकता है। उन्होंने कहा कि जॉर्ज एवरेस्ट प्रकरण में भी सरकार ने इसी प्रकार की प्रक्रिया अपनाई थी। नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि 29 अगस्त 2025 को मुख्य सचिव उत्तराखंड की अध्यक्षता में हुई बैठक में राज्य के विभिन्न विभागों की 27 स्थानों पर स्थित हजारों एकड़ भूमि के “इष्टतम उपयोग” के नाम पर अन्य माध्यमों से हस्तांतरण पर सहमति बनी थी।
इसके बाद दिसंबर 2025 में इन 27 में से दो भू-खंड—डाकपत्थर, विकासनगर (देहरादून) स्थित 77 हेक्टेयर जल विद्युत निगम भूमि तथा रामगढ़ (नैनीताल) स्थित उद्यान विभाग की 8 हेक्टेयर भूमि—को हॉस्पिटैलिटी प्रोजेक्ट के नाम पर यूआईआईडीबी को देने का शासनादेश नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम द्वारा जारी किया गया। उन्होंने आगे बताया कि 15 जनवरी 2026 को प्रमुख सचिव ने यूआईआईडीबी के प्रबंध निदेशक के रूप में देहरादून व नैनीताल के जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर दोनों भूमि का दाखिल-खारिज यूआईआईडीबी के नाम करने तथा सीमांकन कराने के निर्देश दिए।
श्री आर्य ने आरोप लगाया कि ये जमीनें पूर्व में किसानों से अधिग्रहित की गई थीं और अब बिना पूर्ण प्रक्रिया अपनाए हस्तांतरित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि जल विद्युत निगम की भूमि किसी अन्य को देने से पूर्व प्रस्ताव निगम बोर्ड से पारित होना आवश्यक था, जो नहीं किया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब सरकार को भूमि संबंधी नियमविरुद्ध कार्य कराने होते हैं तो संबंधित विभागों के सचिव या निगमों के प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार एक ही अधिकारी को दे दिया जाता है, जिससे निर्णय प्रक्रिया संदिग्ध हो जाती है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी भूमि किसी व्यावसायिक समूह को देने का निर्णय कैबिनेट से अनुमोदित होना चाहिए था तथा इसे विधानसभा में भी रखा जाना चाहिए था। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि जॉर्ज एवरेस्ट मामले की तरह यहां भी प्रतिनियुक्ति पर आए किसी कनिष्ठ अधिकारी के माध्यम से भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी।
श्री आर्य ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि यही स्थिति रही तो भविष्य में राज्य सरकार के पास विकास योजनाओं व सार्वजनिक कार्यों के लिए भूमि का अभाव हो जाएगा।
