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उधमसिंह नगर

नगर निगम में भी बैठा एक भष्ट डीपीआरओ जैसा अधिकारी। कार्यों के वर्क आर्डर पर ले लेता है अपना कमीशन। काम छिनने के भय से मुंह नहीं खोलते ठेकेदार। पूर्व मेयर के कार्यकाल में कागजों पर हुए पांच करोड़ के कामों का भी हो गया भुगतान! 

नरेन्द्र राठौर

रुद्रपुर (खबर धमाका)। नगर निगम रुद्रपुर में भी भष्ट डीपीआरओ की तरह एक अधिकारी बैठा है। वह हर टेंडर में वर्क आर्डर देने से पहले कमीशन ले लेता है।जो ठेकेदार इसमें आनाकानी करता है,उसे वर्क आर्डर नहीं मिलता है,यह तक के काम पूरा होने के बाद भी चहेते ठेकेदारों को भुगतना में कमीशनखोरी चलती है। वहीं ठेकेदार काम छिनने के भय के चलते अपना मुंह नहीं खोल पाते।

ऊधमसिंहनगर एक लाख की घूस लेते रंगे हाथों गिरफ्तार हुए डीपीआरओ रमेश चंद्र त्रिपाठी की कहानी तो आपने पड़ी होगी। उसके कारनामें भी जग जाहिर हो चुके हैं। विजिलेंस जांच में डीपीआरओ 10 प्रतिशत की कमीशन देता था इसकी भी पुष्टि हो चुकी है, लेकिन सरकारी सिस्टम में कमीशनखोरी का घुन सिर्फ एक जगह नहीं लगा है,जिस नगर निगम में मेयर ईमानदारी की कसमें खाता है,उसी नगर निगम में भी कमीशनखोरी का खेल खुलेआम खेला जाता है, ठेकेदारों की मानें तो एक अधिकारी हर काम का टेंडर होते ही,आठ से 10 प्रतिशत कमीशन वर्क आर्डर देने से पहले ही ले लेता है,यह तक की टेंडर सिर्फ दिखावा है, कौन सा काम किस ठेकेदार को दिया जायेगा,इसका मजमून पहले ही लिख दिया जाता है। बडे बड़े काम सिर्फ उन्हीं ठेकेदारों को मिलते हैं,जो या मेयर का चहेता है या फिर दिल खोलकर कमीशन देता है। बाकी ठेकेदारों को छोटे मोटे काम देखकर उन्हें भुगतना में उलझा दिया जाता है। बताया तो यह भी जाता की इसी अधिकारी के कहने पर कामों बजट ज्यादा करके दिखाया जाता है, उदाहरण के लिए G-20 के दौरान बनाई गई गांधी की दीवार है, जहां पहले से ही दीवार बनी हुई थी, अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान छतिग्रस्त हुई दीवार को ने सिरे से बनाने का टेंडर 20 लाख का बनाकर चहेते ठेकेदारों का काम दे दिया गया। ठेकेदारों ने पुरानी दीवार पर ही मरहम पट्टी करके काम पूरा कर दिया।इसी तरह आवास विकास गुरुद्वारे रोड से डीडी चौक तक 56 लाख की लागत से हुयूमन पैन लैन डालने का टेंडर दो घंटे में चहेते ठेकेदार को दे दिया गया,जिसका काम आज तक पूरा नहीं हुआ है, मजेदार बात यह है,की ठेकेदार से कमीशन का हिस्सा भष्ट अधिकारियों ने पहले ही ले लिया। काशीपुर बाईपास रोड पर पुलिया, कल्याणी नदी की सफाई और टाचिंग ग्रांउड के कूड़ा निस्तारण में भी बड़ा खेल हुआ है।सूत्र तो यह भी बता रहे की की बड़े काम कागजों पर ही पूरे करके हिस्सा बंटवारा कर लिया गया है। पूर्व मेयर सोनी कोली के कार्यकाल में जो काम कागजों पर हुए थे, उसके भुगतान पर तत्कालीन नगर आयुक्त जयभारत सिंह ने रोक लगा दी थी, बताया जा ऐसे करीब पांच करोड़ रुपए के काम थे,भष्ट अधिकारियों ने नगर आयुक्त जयभारत की स्थानांतरण के बाद उसका भी अपना हिस्सा लेकर भुगतान कर दिया है। नगर निगम में चल रहे बड़े भष्टचार की जांच की जरूरत है। बताया जा रहा की जांच ठीक से हुई तो करोड़ों के घपले समाने आयेंगे,नगर निगम के नीचे से ऊपर तक कई कर्मचारियों और अधिकारियों का हथकड़ी लगनी तय है।