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उत्तराखंड

सरकारी सिस्टम में अंदर तक घुस चुकी घूसखोरी।लोनिवि,नगर निगम,सिंचाई विभाग,पेयजल विभाग समेत कार्यदाई संस्थाओं में तय होता कमीशन! कमीशनखोरी की बजह से नहीं होते गुणवत्तायुक्त काम। ज्यादा कमीशन देने वालों को ही मिलता है काम

नरेन्द्र राठौर 

रुद्रपुर(खबर धमाका)। एक लाख की घूस लेते जिला पंचायती राज अधिकारी रमेश चंद्र त्रिपाठी की गिरफ्तारी कोई हैरानी की बात नहीं है। इससे पहले भी ऊधमसिंहनगर में कई अधिकारियों को विजिलेंस ने ऐसे मामलों में गिरफ्तार किया। लाखों का वेतन लेने के बाद भी विभागों के अधिकारियों के मन में घूसखोरी का लालच ऐसे बैठ गया है,कि वह अपना हिस्सा लेने के लिए किसी भी हद तक चले जा रहे।निर्णाणादाई संस्थाओं में तो बकायदा कमीशन का रेट तय है।इसी बजह से न उपकरण खरीदे में गुणवत्ता देखी जाती है और न निर्माण कार्यों में,

पिछले दिनों नगर निगम में निकले 45 टेंडरों में खबर आती थी, टेंडर पूल कर दिए गए,एक अफसर ठेकेदारों का काम मिला है, उनसे आठ प्रतिशत कमीशन मांग रहा। लोगों ने इसको लेकर काफी हंगामा भी, उच्च अधिकारियों से जांच की मांग भी की गती, लेकिन सब कुछ दवा दिया गया। शहर में बनी पुलिया, गांधी पार्क की दीवार और 56 लाख की लागत आवास विकास गुरुद्वारे रोड से डीडी चौक तक हुयूमन पैंट डालने के मामले में भी बड़ी कमीशनखोरी के आरोप लगे हैं। यह सभी काम ऐसे हैं,तो आनन फानन में चहेते ठेकेदारों को दिए गए हैं, जहां दो लाख काम था, लेकिन टेंडर 10 लाख का निकला गया। यह तो सिर्फ उदाहरण है, सिंचाई विभाग, लोनिवि, डीडीए पेयजल विभाग और कई निर्माण करने वाली एजेंसियों में कमीशनखोरी का खेल अन्दर तक बैठ गया है। जी-20 में हुए कामों में बड़े भष्टचार की खबरें समाने आ रही है। बताया तो यह भी जा रहा की जो काम एन एच को कराना था वह प्रशासन ने कराकर एन एच से समझौता कर लिया। जिसमें पूर्व डीएम को अपनी कुर्सी से भी हाथ धौना पड़ा है । जो ज्यादा कमीशन देता है,उसे काम मिलता है। सूत्रों की मानें तो की काम कागजों में ही करके भुगतान हो रहा है। कई जगहों पर ऐसे काम हो रहे जहां उसकी जरुरत नहीं है,और जहां जरुरत है,वहां पर अनदेखी की जा रही है। डीडीए में भी यह काम धड़ल्ले से हो रहा। भूमाफिया क्षेत्र में अवैध रूप से कालौनिय काट कर लाखों के वारे न्यारे कर रहे, जिससे सरकार का बड़े राजस्व का नुक्सान हो रहा है। बताया की जिले में काटी जा रही 80 प्रतिशत कालौनियां अवैध है,जिनके खिलाफ शिकायत के बाद भी कार्यवाही नहीं होती है, भूमाफियाओं कई जगह तो सरकारी जमीन,नदी, तालाबों चकरोडों को भी बेच दिया है।

जिलाधिकारी उदयराज सिंह ने कहा कि यह गंभीर मामले हैं। सभी विभागों के अधिकारियों को ईमानदारी से काम करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि भविष्य में ऐसी शिकायतें समाने आई तो कार्रवाई की जायेगी। उन्होंने कहा की सभी को ईमानदारी से काम करना चाहिए।

तराई में विजिलेंस कई बार ट्रैप कर चुकी है घूसखोर

रुद्रपुर। तराई में घूसखोरी में पहली बार अधिकारी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। इससे पहले भी विजिलेंस ने अधिकारियों और कर्मचारियों को घूस लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। हाल ही में सीएमओ कार्यालय में तैनात एसीएमओ को विजिलेंस ने घूस लेते रंगे हाथों पकड़ा था।

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अब तक आए केस

केस – 1

जनवरी 2020 में झनकईयां थाने में तैनात सिपाही कुशल कन्याल को विजिलेंस की टीम ने 20,000 रुपये की घूस लेते हुए ट्रैप किया था। मकान में हो रहे विवाद को निपटाने के लिए सिपाही ने घूस मांगी थी।

केस – 2

10 अगस्त 2022 को चकबंदी कार्यालय में तैनात पेशकार आनंद चंद्र को विजिलेंस की टीम ने तीन हजार की घूस लेते हुए पकड़ा था। पेशकार ने भूमि की दाखिल खारिज कराने के एवज में रिश्वत मांगी थी।

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केस – 3

दो जून 2022 को विजिलेंस ने नगर पंचायत कार्यालय सुल्तानपुर पट्टी के हेड क्लर्क देवनाथ मिश्रा को 26,000 रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा। आरोपी ठेकेदार से बिल पास कराने के एवज में रिश्वत मांग रहा था।

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केस – 4

24 जनवरी 2023 को किच्छा तहसील में तैनात कानूनगो धनेश कुमार को विजिलेंस ने पांच हजार की घूस लेते हुए पकड़ा था। कानूनगो ने कृषि भूमि को शिकायतकर्ता के नाम कराने के एवज में रिश्वत मांगी थी

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केस – 5

23 मार्च 2023 को गदरपुर के गिरधरपुर गांव की प्रधान कविता गुंबर को विजिलेंस टीम ने 6,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा था। प्रधान ने फाइल में हस्ताक्षर करने के नाम पर रिश्वत मांगी थी।

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केस – 6

आठ मई 2023 को विजिलेंस ने सीएमओ कार्यालय में 16,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए चिकित्सा लेखाकार अनिल जोशी और एसीएमओ डॉ. तपन शर्मा को रिश्वत मांगते हुए गिरफ्तार किया था। आरोपी नुक्कड़ नाटक का बिल पास रिश्वत मांग रहे थे।