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उत्तराखंड

बड़ा विवाद,अब अटरिया मंदिर की मंहत पहुंची एसडीएम के दरबार।किच्छा के पूर्व विधायक शुक्ला ने भी की पैरवी।एसडीएम बोले सरकारी जमीन पर नहीं होने दी जायेगी वसूली। मेला समिति के आरोपों का नहीं दिया जबाब

नरेन्द्र राठौर
रुद्रपुर। क्षेत्र के प्रसिद्ध अटरिया मंदिर मेले को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। मेला समिति की मंदिर में प्रशासक नियुक्त करने की मांग के बाद अब मंदिर की मंहत ने किच्छा के पूर्व विधायक शुक्ला के एसडीएम से मुलाकात की है। उन्होंने ठेकेदारों पर मेरे में व्यवधान उत्पन्न करने का आरोप लगाते हुए सहयोग की मांग की है। उन्होंने कोर्ट का स्टे भी दिखाया है। एसडीएम ने स्टे का परीक्षण कर सहयोग का भरोसा दिया है। एसडीएम ने साफ कहा की सरकारी जमीन पर वसूली नहीं होनी थी जायेगी। प्रशासन सरकारी जमीन को अपने काम में प्रयोग करेगा। मंहत ने पैसे की गड़बड़ी और सजायफ्ता बेटे का कमेटी का सचिव बनाने के आरोपों का कोई जबाव नहीं दिया।
गौरतलब है की मंगलवार को अटरिया मेला समिति के लोगों ने एडीएम जय भारत सिंह से मुलाकात कर मंदिर की मंहत पर चढ़ावे व मेले से होने वाली आय को मंदिर की जगह अपने परिवार पर खर्च करने का आरोप लगाकर मंदिर में रिसीवर नियुक्त करने की मांग की थी। उन्होंने मंहत पर अपने सजायफ्ता पुत्र को मंदिर कामेटी का सचिव नियुक्त करने का आरोप भी लगाया था,उनका कहना था की मंदिर में अपराधी प्रवृत्ति के लोगों को सरण दी जा रही,जो मेले में व्यवधान उत्पन्न कर सकते हैं, उन्होंने मामले एसपी सिटी से भी मुलाकात की थी, बुधवार को इस मामले में मंदिर की मंहत पुष्पा देवी किच्छा के पूर्व विधायक के साथ एसडीएम कार्यालय पहुंची। जहां पर उन्होंने एसडीएम को कोर्ट से मिला स्टे दिखाया। उन्होंने एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें पूर्व ठेकेदारों पर मेला लगने के दौरान व्यवधान उत्पन्न करने का आरोप लगाया। एसडीएम ने कहा की वह स्टे का परीक्षण कर कोर्ट के आदेशों का पालन करायेगें। एसडीएम ने यह भी साफ कर दिया की सरकारी जमीन पर वसूली नहीं होने दी जायेगी।
इधर मेला कमेटी के पदाधिकारियों की मानें तो सिर्फ मंदिर को जमीन पर स्टे मिला है। सरकारी और उनकी जमीन से स्टे का कोई मतलब नहीं। वर्तमान में मंहत और मेला कमेटी की सिर्फ तीन बीघा जमीन बची है, जिसमें एक बीघा में मंदिर है,मंहत अपनी जमीन पर मेला का आयोजन कराये।